पूजा निषाद
३० साल पहले लंदन सेंट्रल के वेस्टमिंस्टर इलाके में एक ३९ साल की एक सेक्स वर्कर की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। १४० बार वार किया गया था, उसका नाम था मरीना कोप्पल। हत्या के मामले में २८ साल तक तो उस हत्यारे का कहीं नाम भी नहीं आया था, लेकिन २०२२ में उसके नाम मुकदमा दर्ज किया गया और तीस साल बाद कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी। लेकिन सवाल यह है कि हत्याकांड को सुलझाने में ३० साल क्यों लग गए?
मरीना ज्यादातर वक्त अपने फ्लैट में ही गुजारती थी, वह वीकेंड्स अपने पति के साथ नॉर्थम्प्टन में समय बिताती थी। वह कभी-कभी सेक्स वर्कर के तौर पर काम करती थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं था। मरीना कोलंबिया में काम करती थी और अपनी मां को पैसे भेजती थी, जहां उसके दो बच्चे रहते थे।
फ्लैट पर मिली लाश
८ अगस्त १९९४ को जब मरीना कई दिनों तक अपने पति से नहीं मिली तो वह मरीना को ढूंढने उसके फ्लैट पर गया, वहां उसने अपनी पत्नी का शव खून से लथपथ पड़ा पाया। उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके से सबूत जुटाए। पुलिस को मरीना की उंगली पर एक अंगूठी मिली और एक प्लास्टिक शॉपिंग बैग भी मिला, जिस पर उंगलियों के निशान थे। मरीना की अंगूठी पर एक बाल फंसा हुआ था। यह अंगूठी हत्या वाली जगह से ही बरामद हुई थी। जब इस बाल का डीएनए मैच कराया गया तो संदीप पटेल नामक शख्स के बारे में जानकारी मिली। घटनास्थल पर मिले पैरों के निशान भी उसी के ही थे।
बाल से सुलझी मर्डर मिस्ट्री!
तो पुलिस के सामने सवाल यह था कि क्या हत्यारा उसके कस्टमर में से एक था? या फिर मकसद डवैâती था? और एक सुराग जो हाथ लगा था मरीना का बैंक कार्ड हत्या के तुरंत बाद नकदी निकालने के लिए। ऊश् पर इस्तेमाल किया गया था।
रुकी रही जांच
बैग पर पाए गए फिंगरप्रिंट से पहचान की गई कि यह २१ वर्षीय संदीप पटेल का था, वह अपने पिता की ‘शर्लक होम्स न्यूज’ नाम की दुकान पर काम करता था। बरामद बैग उसी दुकान से था और माना गया कि उस बैग पर उसका फिंगरप्रिंट पाया जाना नॉर्मल था और संदीप एक संदिग्ध के रूप में नहीं माना गया। पुलिसिया जांच एक दशक से अधिक समय तक वहीं अटकी रही।
२००८ में सबूतों को फिर से जांचते समय मरीना की अंगूठी पर एक बाल पाया गया। हालांकि, यह तब तक नहीं पता चला था कि २०२२ में नए साइंटिफिक तकनीकों का उपयोग करके उससे एक डीएनए प्रोफाइल पता लगा सकते हैं। डेटाबेस से पता चला कि यह पटेल का डीएनए था।
सबूत देने में विफल
२०२२ में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हत्या के बाद मरीना का एटीएम कार्ड पटेल के घर के पास मिला। पटेल के पैरों के निशानों का मिलान मरीना के कमरे से मिले पैरों के निशानों से भी हो गया।
हालांकि, पटेल ने हत्या से इनकार किया, लेकिन वह अपने बचाव में कोई सबूत देने में विफल रहा। ओल्ड बेली जूरी ने तीन घंटे और १० मिनट तक विचार-विमर्श के बाद उसे दोषी करार दिया। पुलिस विभाग ने इसका श्रेय फॉरेंसिक साइंटिस्ट, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट, फॉरेंसिक मैनेजर की पूरी जांच टीम को दिया।
