-शिंदे और दादा के नेतृत्व पर साधा निशाना
-भाजपा पदाधिकारी के पोस्ट से भड़का असंतोष
सामना संवाददाता / मुंबई
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजीत पवार इन तीनों के समर्थकों में प्रतिस्पर्धा जारी है कि कौन-सा नेता सबसे दमदार है। इस वजह से कहीं न कहीं महायुति सरकार की गाड़ी भीतर से डगमगाने लगी है। इसी बीच भाजपा की आध्यात्मिक समन्वय आघाड़ी के प्रदेश प्रमुख की नो भाईगीरी, नो दादागीरी, महाराष्ट्र में सिर्फ देवाभाऊ का न्याय चलेगा वाली पोस्ट ने शिंदे और दादा गुट की नेतृत्व क्षमता पर न केवल सीधा हमला बोला है, बल्कि भीतरखाने चल रही जंग की आग में एक तरह से घी डालने का काम किया है। फिलहाल, फडणवीस को देवाभाऊ कहकर महिमामंडन करने वाली इस टिप्पणी से न केवल असंतोष साफ झलकता दिखाई दे रहा है, बल्कि महायुति के भीतर श्रेय की लड़ाई और आपसी अविश्वास खुलकर सतह पर आ चुका है। भले ही उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, मगर सबको पता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में भाई और दादा किसे कहा जाता है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई के आजाद मैदान में पांच दिन तक अनशन किया था। सरकार की ओर से पैनल मीटिंग और हाई कोर्ट के आदेशों के बीच जरांगे ने आखिरकार हैदराबाद गजेटियर के आधार पर आरक्षण स्वीकार किया और अनशन खत्म किया। इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री फडणवीस की संयमित भूमिका की भाजपा ने जमकर सराहना की। इसी के साथ ही भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर श्रेय लेने की होड़ मचाई। मराठा समाज को न्याय सिर्फ देवेंद्र फडणवीस ने दिया, न कि शिंदे ने, जो खुद मराठा के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री हैं।
अजीत पवार का विवादित वीडियो
दूसरी तरफ अजीत पवार का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें माढा तालुका के कुर्डू गांव में अवैध उत्खनन पर कार्रवाई करने पहुंचीं आईपीएस अधिकारी अंजना कृष्णा को उन्होंने फोन पर कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए। वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया कि आप पर भी एक्शन लिया जाएगा। इस वीडियो ने राजनीतिक माहौल और गरमा दिया। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।
भाजपा का इशारा साफ
तुषार भोसले की पोस्ट का मकसद भी यही माना जा रहा है कि भाजपा नेताओं के मन में शिंदे और अजीत पवार के प्रति नाराजगी गहराती जा रही है। संदेश साफ है कि महाराष्ट्र को सिर्फ और सिर्फ देवेंद्र फडणवीस ही न्याय दे सकते हैं। भाजपा की रणनीति भी यही है कि राज्य सरकार के किसी भी फैसले या उपलब्धि का श्रेय महायुति को नहीं, बल्कि सीधे देवाभाऊ को मिले। चाहे जरांगे आंदोलन हो या गणेशोत्सव को राज्य उत्सव का दर्जा देने का पैâसला सब कुछ फडणवीस मास्टरस्ट्रोक के तौर पर जनता के मन में बैठाने की कोशिश की जा रही है।
