-होर्मुज संकट के बाद सऊदी की तेल पाइपलाइन भी बंद; कच्चा तेल १०५ डॉलर के करीब
-कोंकण की ओर लाखों यात्रियों की रवानगी के बीच
-पेट्रोल-डीजल, बस किराया और माल ढुलाई महंगी होने का खतरा
सामना संवाददाता / मुंबई
गणेशोत्सव के बीच महाराष्ट्र से लाखों लोग कोंकण की ओर निकल रहे हैं, लेकिन इसी समय पश्चिम एशिया में गहराए तेल संकट ने महंगाई का नया खतरा पैदा कर दिया है। होर्मुज में बाधा के बाद सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी ड्रोन हमले के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।
इस घटनाक्रम के बाद कच्चा तेल करीब १०५ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जबकि रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो भारत का आयात खर्च बढ़ेगा और इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन तथा माल ढुलाई की लागत पर पड़ सकता है।
सामानों की ढुलाई भी होगी महंगी
गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र में सड़क परिवहन पहले ही चरम पर है। मुंबई, ठाणे, पालघर और पुणे से लाखों लोग निजी वाहनों, बसों और टैक्सियों से कोंकण जा रहे हैं। ऐसे समय में र्इंधन की लागत बढ़ी तो यात्रा के साथ-साथ फल, सब्जी, फूल, मिठाई और पूजा सामग्री की ढुलाई भी महंगी पड़ सकती है। यानी पश्चिम एशिया का तेल संकट इस बार गणपति उत्सव की थाली और यात्रा दोनों का खर्च बढ़ाने का खतरा पैदा कर रहा है।
दोनों तेल दरवाजों पर ताला!
पश्चिम एशिया का ऊर्जा संकट अब केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं रहा है। ईरान समर्थित हूतियों ने लाल सागर के रणनीतिक मायून (पेरिम) द्वीप और आसपास के तटीय इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह द्वीप बाब-अल-मंदेब के मुहाने पर स्थित है, जहां से होकर लाल सागर और स्वेज नहर की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार गुजरता है। इससे दुनिया के दूसरे बड़े समुद्री तेल मार्ग पर भी खतरा बढ़ गया है।
इसी बीच सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी लगभग १,२०० किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अस्थायी रूप से बंद कर दी है। होर्मुज में बाधा के बाद यही पाइपलाइन सऊदी तेल को लाल सागर तक पहुंचाने का सबसे अहम वैकल्पिक रास्ता थी और हाल के दिनों में इससे प्रतिदिन करीब ४० से ५० लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था।
यानी वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अब तीन तरफ से दबाव बन रहा है, होर्मुज में संकट, बाब-अल-मंदेब पर हूतियों का बढ़ता नियंत्रण और सऊदी की जमीनी पाइपलाइन का बंद होना। इसका असर बाजार में दिखने लगा है। तेल १०० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और अमेरिकी डीजल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ है।
