-अजीत गुट की वित्त विभाग पर नजर से बढ़ी सियासी हलचल
-सत्ता के भीतर हिस्सेदारी को लेकर नए सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सत्ता की असली ताकत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विभागों के बंटवारे और महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर पकड़ को लेकर सहयोगी दलों के बीच खींचतान की चर्चा ने सरकार के भीतर के समीकरणों को सुर्खियों में ला दिया है। अजीत पवार गुट की ओर से वित्त विभाग की मांग को इसी सत्ता-संतुलन की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। वित्त विभाग किसी भी सरकार का सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय माना जाता है। राज्य का बजट, खर्च की मंजूरी, विकास योजनाओं के लिए धन, विभिन्न विभागों को वित्तीय आवंटन और बड़े आर्थिक फैसलों पर इसका सीधा प्रभाव होता है। यही वजह है कि वित्त विभाग को लेकर होने वाली राजनीतिक खींचतान महज मंत्रालय के बंटवारे का मामला नहीं, बल्कि सरकार में वास्तविक प्रभाव किसके हाथ में है, इसका संकेत भी मानी जाती है।
महायुति में अलग-अलग दल सत्ता में हिस्सेदार हैं, लेकिन सवाल यह है कि सरकार की आर्थिक दिशा तय करने में किसकी निर्णायक भूमिका होगी? अजीत पवार गुट की वित्त विभाग को लेकर रुचि को इसी सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्ता में साझेदारी के बावजूद यदि महत्वपूर्ण विभागों का संतुलन किसी एक खेमे की ओर झुका दिखाई देता है तो सहयोगी दलों के भीतर असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।
