वो कल थे तो आज हम हैं
उनके ही तो अंश हम हैं।
जीवन मिला उन्हीं से
उनके कृतज्ञ हम हैं,
सदियों से चलती आयी
श्रंखला की कड़ी हम हैं।
गुण धर्म उनके ही दिए
उनके प्रतीक हम हैं,
रीत-रिवाज उनके हैं दिए
संस्कारों में उनके हम हैं।
देखा नहीं सब पुरखों को
पर उनके ऋणी तो हम हैं,
पाया बहुत उन्हीं से पर
न जान पाते हम हैं।
दिखते नहीं वो हमको
पर उनकी नजर में हम हैं,
देते सदा आशीष हमको
धन्य उनसे हम हैं।
खुश होते उन्नति से
दुखी होते अवनति से,
देते हमें सहारा
उनकी संतान जो हम हैं।
इतने जो दिवस मनाते
मित्रता प्रेम आदि के,
पितरों को भी याद कर लें
जिनकी वजह से हम हैं।
आओ नमन कर लें, कृतज्ञ हो लें,
क्षमा मांग लें, आशीष ले लें
पितरों से जो चाहते हमारा भला
उनके जो अंश हम हैं…!
-अमित कुमार गुप्ता बजरंगी
