मुख्यपृष्ठखेलपोर्न स्टार बनकर फंसाए खिलाड़ी...खेल जगत में अरबों डॉलर की ठगी का...

पोर्न स्टार बनकर फंसाए खिलाड़ी…खेल जगत में अरबों डॉलर की ठगी का नेटवर्क

-‘एआई, डीपफेक और फर्जी पहचान: खिलाड़ियों पर साइबर अपराध का नया हमला’

दुनिया के बड़े खिलाड़ी अब सिर्फ मैदान में विरोधियों से नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के अपराधियों से भी जूझ रहे हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, खिलाड़ियों को निशाना बनाने वाली साइबर ठगी अब अरबों डॉलर के संगठित अपराध में बदलती जा रही है। सोशल मीडिया, सार्वजनिक जीवन, निजी जानकारी की आसान उपलब्धता और एआई तकनीक ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपराधी अब सामान्य फिशिंग ईमेल तक सीमित नहीं हैं। वे खिलाड़ियों के सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल, फोन नंबर, पारिवारिक जानकारी, यात्रा कार्यक्रम और आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाते हैं। कई मामलों में डीपफेक वीडियो, नकली आवाज और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर खिलाड़ियों को भरोसे में लिया जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों के गेमिंग अकाउंट, घर के नेटवर्क और परिवार के उपकरण भी अपराधियों के प्रवेश द्वार बन रहे हैं।
इसी कड़ी में अमेरिका में एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां जॉर्जिया के क्वामेन जेरल फोर्ड नामक व्यक्ति पर आरोप लगा कि उसने एक प्रसिद्ध वयस्क फिल्म अभिनेत्री बनकर एनएफएल और एनबीए खिलाड़ियों को फंसाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने अश्लील वीडियो भेजने का झांसा देकर खिलाड़ियों के एप्पल अकाउंट की लॉगिन जानकारी हासिल करने की कोशिश की और फिर फर्जी एप्पल सपोर्ट पहचान का भी इस्तेमाल किया। उस पर वायर फ्रॉड, कंप्यूटर फ्रॉड, पहचान चोरी और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
खिलाड़ी अपराधियों के लिए इसलिए आसान लक्ष्य बनते हैं, क्योंकि उनकी प्रसिद्धि, आय, जीवनशैली और निजी गतिविधियां अक्सर सार्वजनिक होती हैं। एक छुट्टी की तस्वीर भी चोरों को बता सकती है कि घर खाली है। जन्मतिथि, स्कूल-कॉलेज, परिवार, घर का पता, ईमेल और कभी-कभी सोशल सिक्योरिटी जैसी संवेदनशील जानकारी डेटा लीक के जरिए अपराधियों तक पहुंच जाती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एआई ने इस अपराध को और खतरनाक बना दिया है। अब नकली चेहरा, नकली आवाज और नकली चैट तैयार करना पहले से आसान हो गया है। पहले जहां ठगों को लंबी तैयारी करनी पड़ती थी, अब वे कुछ मिनटों में किसी खिलाड़ी, अभिनेत्री, एजेंट या ब्रांड प्रतिनिधि की विश्वसनीय डिजिटल पहचान बना सकते हैं।
यह मामला केवल अमेरिका या यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत में भी क्रिकेटर, फिल्मी सितारे, इन्फ्लुएंसर और बड़े कारोबारी इसी तरह के जोखिम में हैं। लोकप्रियता अब सिर्फ कमाई का माध्यम नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए खुला दरवाजा भी बन गई है। खिलाड़ियों और उनके मैनेजरों के लिए अब फिटनेस ट्रेनर, एजेंट और पीआर टीम जितनी ही जरूरी साइबर सुरक्षा टीम भी हो गई है।

अन्य समाचार