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कबूतरों से फैल रहा जहर!.. दादर कबूतरखाने पर गिरी मनपा की गाज!.. दाना डालना अपराध, मुंबई में पहली एफआईआर दर्ज

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबईभर में कबूतरों के मल और पंखों से जहर जैसी स्थिति पैदा हो रही है। इसकी वजह से श्वसन रोग पैâल रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए आखिरकार मनपा ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद दादर कबूतरखाने पर मनपा की गाज गिरी है। इससे मचे बवाल के बाद माहिम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पहली बार कबूतरों को दाना डालने पर एफआईआर दर्ज की है। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं स्थानीय नागरिकों और पक्षी प्रेमियों ने इसका तीव्र विरोध किया है। आलम यह है कि कबूतरखाने को हटाने की मुहिम अब टकराव का कारण बन गई है।
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि कबूतरखानों में पक्षियों को दाना डालना प्रतिबंधित है, क्योंकि उनकी बीट और पंखों से पैâलनेवाले तत्व लोगों में गंभीर श्वसन बीमारियों का कारण बन रहे हैं। इसके बावजूद दादर में आदेशों की अवहेलना होती रही। शनिवार को माहिम में एक अज्ञात कार चालक द्वारा कबूतरों को दाना डालते हुए देखा गया, जिसके बाद उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा २२३, २७० और २७१ के तहत एफआईआर दर्ज की गई। अब मनपा और पुलिस की संयुक्त टीम ऐसे अन्य मामलों पर भी कड़ी नजर रख रही है।
हाई कोर्ट के आदेश पर अमल
कोर्ट के अनुसार, अगर कोई कबूतरखाने पर दाना डालता है तो ५०० रुपए का जुर्माना और केस दर्ज किया जाएगा। इसीलिए मुंबई पुलिस और मनपा ने नागरिकों से अपील की है कि वे कबूतरों को दाना न डालें।
कबूतरखाने को गिराने गई मनपा टीम, हुआ विरोध
शुक्रवार की आधी रात मनपा की एक टीम दादर कबूतरखाना तोड़ने पहुंची, लेकिन वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए और उन्होंने इस कार्रवाई का तीव्र विरोध किया। हालात बिगड़ते देख वहां भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। सुरक्षा के बीच कबूतरखाने की छत की टीन और अन्य सामग्री हटाई गई। अब वहां केवल एक पिंजरा बचा है, जिसमें कबूतर रहते हैं। सबकी नजर अब इस पर है कि वह कब हटाया जाएगा।
कबूतरों की बढ़ती संख्या से चिकित्सक भी चिंतित
सैफी अस्पताल के एम.डी. मेडीसिन डॉ. दीपेश जी. अग्रवाल ने कहा कि कबूतरों को भले ही मानवता के चलते लोग दाना डालते हैं, लेकिन इस आदत के पीछे एक गंभीर शहरी स्वास्थ्य संकट छिपा हुआ है, जिसकी अनदेखी अब मुमकिन नहीं है। इस आदत से इंसानी बस्तियों में कबूतरों की आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है, लेकिन अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होता कि कबूतरों के मल से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें यूरिक एसिड, अमोनिया जैसे रसायन होते हैं और यह बैक्टीरियां व फपंâूद के लिए उपयुक्त माध्यम बन जाता है।
स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों का विरोध
स्थानीय लोगों का कहना है कि कबूतरों से किसी को कोई परेशानी नहीं है। उनका आरोप है कि इस इलाके में फ्लैट नहीं बिक रहे, इसलिए बिल्डर लॉबी के दबाव में कबूतरखाना हटाया जा रहा है। पक्षी प्रेमी भी इस कार्रवाई के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहे हैं।

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