मुख्यपृष्ठस्तंभपॉलिटिका : बागियों का सरदार बनने की दस्तक?

पॉलिटिका : बागियों का सरदार बनने की दस्तक?

के.पी. मलिक

नितिन गडकरी के हालिया बयान कि ‘सबसे अच्छा नेता वही जो सबसे ज्यादा झूठ बोल सके’ ने भारतीय राजनीति में बवाल मचा दिया है। ठीक उसी समय जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उप राष्ट्रपति चुनाव की रणनीतियों में जुटे हैं, गडकरी का यह तीखा हमला पार्टी की गुजरात लॉबी के लिए अशुभ संकेत है। अब बड़ा सवाल है: क्या गडकरी वाकई एनडीए के बागियों के सिरमौर बनने को तैयार हैं?
संदेह की गुंजाइश!
गुजरात लॉबी पर निशाना साध कर एक बार फिर गडकरी ने भाजपा के भीतर एक स्वतंत्र और मुखर नेता के तौर पर जगह बना ली है। उनके वक्तव्य का समय बेहद संवेदनशील है उप राष्ट्रपति चुनाव मात्र कुछ दिन दूर है। माना जा रहा है कि उनकी नाराजगी का मुख्य केंद्र गुजरात लॉबी है, जो पार्टी की रणनीति पर हावी है और सवालों की आंच से बचने का प्रयास करती रही है। गडकरी के इस हमलावर तेवर से साफ है कि वे पार्टी नेतृत्व की शैली और प्राथमिकता पर खुल कर सवाल उठा रहे हैं।
गुजरात लॉबी गडकरी को गोदी मीडिया के सहारे एथनॉल विवाद में धकेल कर संघ के सपने यानी पीएम की रेस से बाहर करना चाहती है, क्योंकि गडकरी के खिलाफ एथनॉल कंपनियों को लेकर मीडिया का एकतरफा हमला संदेह पैदा करता है। देश में करीब तीन सौ कंपनियां एथनॉल के व्यापार में हैं, लेकिन सिर्फ गडकरी और उनके बेटों की कंपनियां ही निशाने पर क्यों? पार्टी के भीतर गुजरात लॉबी की भूमिका और मीडिया की गोलबंदी, दोनों ने गडकरी और उनके गुट की बेचैनी बढ़ा दी है। गडकरी इस घेराबंदी को निजी हमले की तरह ले रहे हैं और जवाब में सियासी समीकरणों में फेरबदल करने को तैयार नजर आते हैं।
सूत्र बताते हैं कि गडकरी महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं कुछ राजनीतिक जानकारों का दावा है कि उप राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग का माहौल भी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। गडकरी के बागी तेवर पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकते हैं, खासकर ऐसे वक्त में जब सत्ता के गलियारों में असंतोष और भविष्य की राजनीति की नई इबारत लिखी जा रही है।
चेतावनी
बहरहाल, नितिन गडकरी के सामने अब दो रास्ते हैं, पहला या तो वे पार्टी अनुशासन के दायरे में बने रहें, दूसरा या फिर असंतुष्टों की अगुआई करते हुए एनडीए और भाजपा के भीतर एक नया केंद्र बनाएं। उनका यह साहसिक और कटाक्षपूर्ण बयान भाजपा हाईकमान यानी गुजरात लॉबी के लिए चेतावनी है कि सत्ता की राजनीति मात्र रणनीति या लॉबी का खेल नहीं, बल्कि नेतृत्व का एक नया विमर्श भी अब तैयार हो रहा है। अगर गडकरी को दबाने की कोशिशें इसी प्रकार जारी रहीं, तो वे पार्टी के असंतुष्ट बागियों के नेतृत्वकर्ता बन सकते हैं और जो कि भाजपा के सियासी गणित को निर्णायक रूप से बदल सकता है।
नितिन गडकरी के सामने अब दो रास्ते हैं, पहला या तो वे पार्टी अनुशासन के दायरे में बने रहें, दूसरा या फिर असंतुष्टों की अगुआई करते हुए एनडीए और भाजपा के भीतर एक नया केंद्र बनाएं। उनका यह साहसिक और कटाक्षपूर्ण बयान भाजपा हाईकमान यानी गुजरात लॉबी के लिए चेतावनी है कि सत्ता की राजनीति मात्र रणनीति या लॉबी का खेल नहीं, बल्कि नेतृत्व का एक नया विमर्श भी अब तैयार हो रहा है।
गडकरी के इस हमलावर तेवर से साफ है कि वे पार्टी नेतृत्व की शैली और प्राथमिकता पर खुल कर सवाल उठा रहे हैं। गुजरात लॉबी गडकरी को गोदी मीडिया के सहारे एथनॉल विवाद में धकेल कर संघ के सपने यानी पीएम की रेस से बाहर करना चाहती है,

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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