सामना संवाददाता / मुंबई
पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान सजे मंच पर एक ओर जहां सम्मान का माहौल था, वहीं दूसरी ओर शब्दों के तीखे वार भी हो रहे थे। इस वार के चर्चा में चंद्रकांत पाटील का ‘पुणेकर’ टैग रहा। मंच से ही उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने सधे हुए अंदाज में तीर छोड़ा कि पुणे वाले अब भी चंद्रकांत दादा को अपना नहीं मानते है। वे आज भी उन्हें कोल्हापुर का ही समझते हैं। इस चुटकी पर माहौल गर्म था। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी मौका नहीं गंवाया। उन्होंने भी मंझे हुए राजनीतिज्ञों की तरह शब्दबाण चलाते हुए जवाब दिया कि पुणे के दूसरे दादा जो कभी दादागीरी नहीं करते है। इन शब्दबाणों से मंच पर नेताओं के बीच हंसी-मजाक की आड़ में तल्ख सियासी संदेश खूब गूंजे। कुल मिलाकर पूरा समारोह ताजगी भरे व्यंग्य, तंज और पुराने राजनीतिक हिसाब-किताब से भर गया।
पुणे में कल लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया था। इस बीच शुरुआत एक साधारण सी बात से हुई। मंच संचालन कर रही महिला ने कहा कि यहां दो दादा हैं। एक अजीत दादा और दूसरे रोहित दादा मौजूद हैं। फिर उन्होंने चंद्रकांत दादा का नाम जोड़ा। बस यहीं से खेल शुरू हुआ और अजीत पवार ने मौके का फायदा उठाते हुए कहा कि पुणेकर आज भी आपको पुणे का नहीं मानते, वो आपको अब भी कोल्हापुर का ही समझते हैं। यह सीधी चुटकी चंद्रकांत पाटील पर थी, जिनके ‘पुणेकर’ होने पर लगातार सवाल उठते आए हैं। कार्यक्रम तो पुरस्कार का था, पर असली आकर्षण ‘दादाओं’ की तीखी लेकिन हंसी में लिपटी जुबानी जंग रही। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अजीत पवार, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री चंद्रकांत पाटील, मुरलीधर मोहोल और भाजपा पदाधिकारी मौजूद थे। चंद्रकांत पाटील पर उठे सवाल पर मुख्यमंत्री ने तपाक से जवाब देते हुए कहा कि वे पुणे के दूसरे दादा हैं, जो कभी दादागीरी नहीं करते। उनके इतना कहते ही समारोह में शामिल सभी की ठहाके गूंज उठे। इस दौरान अजीत पवार ने मजाकिया लहजे में कहा कि शायद अब भी लोगों को लगता है कि वे कोल्हापुर के हैं। इस पर मुख्यमंत्री को ध्यान देना चाहिए।
