रमेश ठाकुर/नई दिल्ली
बीते दो दिनों से राजधानी में बढ़े प्रदूषण ने सांसों पर संकट और गहरा दिया है। खांसी, आंख, नाक, सिरदर्द, गले में जलन, थकान और बुखार के मरीजों की भरमार हो गई है। अस्तपातों में सांस के मरीज सर्वाधिक बढे़ हैं। दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल एम्स में 30 से 40 फीसदी सांस के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए एम्स अस्पताल के डॉक्टरों ने दिल्ली-एनसीआर में हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई लेवल कहीं-कहीं तो 700 से भी पार हो गया। एम्स के पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ.अनंत मोहन ने ‘दोपहार का सामना’ से बात करते हुए बताया कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं बनीं। हालात बदतर होते जा रहे हैं। इसलिए सरकारी स्तर पर जब तक प्रदूषण को हेल्थ इमर्जेंसी नहीं घोषित किया जाता, समस्या दूर नहीं होगी। मालूम हो, दिल्ली में ग्रेप-4 भी लागू हैं, लेकिन फिर भी प्रदूषण कम नहीं हो रहा। डॉक्टर सांस के मरीजों को दिल्ली छोड़ने की सलाह दे रहे हैं।
