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गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि…चेतावनी बिंदु पारकर गंगा खतरे की निशान की ओर अग्रसर…गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा ने भी धरा रौद्र रूप

उमेश गुप्ता / वाराणसी

वाराणसी में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। गंगा के जलस्तर में 4 सेंटी मीटर की रफ्तार से बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, शुक्रवार की दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के ऊपर पहुंच गया।
आयोग के रिकॉर्ड पर लगातार जिला प्रशासन नजर बनाए हुए है। आयोग के मुताबिक, वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है, जिसे गंगा ने पार कर दिया है। वाराणसी में खतरा बिंदु 71.262 मीटर निर्धारित है। अधिकतम बिंदु अब तक वाराणसी में 73.901 मीटर है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर 4 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है।
आयोग के अनुसार उत्तराखंड, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश और यमुना नदी के जल प्रवाह के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। बीते सप्ताह तक जहां घाट की सीढ़ियां दिखाई देने लगी थीं, वहीं अब गंगा दोबारा घाटों और गलियों की ओर बढ़ने लगी हैं। जिससे मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों पर अंतिम संस्कार में कठिनाई बढ़ी है। शीतला माता मंदिर में पुनः जल प्रवेश हो चुका है। ललिता घाट, दशाश्वमेध, मोरघाट, शीतला घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट पर स्नान और वस्त्र परिवर्तन में परेशानी हो रही है। नगवां नाला में भी धीरे-धीरे पानी प्रवेश कर रहा है।
गंगा का यह रौद्र रूप स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। जल स्तर की वृद्धि के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि गंगा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है और यदि यह वृद्धि इसी गति से जारी रही, तो कई क्षेत्रों में जल भराव की समस्या और गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सक्रिय रहने और स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं, जबक‍ि लगातार बाढ़ का पानी बढ़ने की वजह से काशी व‍िश्‍वनाथ धाम के भीतर भी पानी प्रवेश कर सकता है।
गंगा नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन से संपर्क करें। इसके अलावा स्थानीय निवासियों को सलाह दी गई है कि वे अपने घरों में आवश्यक सामग्री का भंडारण करें और सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी रखें। इस बीच मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे जल स्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में, प्रशासन ने सभी नागरिकों से संयम बनाए रखने और बाढ़ के रुख पर नजर बनाए रखने की अपील की है। वाराणसी में गंगा का जल स्तर बढ़ने की इस स्थिति ने सभी को चिंतित कर दिया है और प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए तत्पर है।
गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा नदी में भी उफान आ गया है, जिससे सलारपुर, सरैया, नक्खीघाट, दानियालपुर और कोनिया इलाकों में पानी भरने लगा है। जिसके कारण 91 परिवारों ने अपने घर खाली किए हैं, जिनमें से 64 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि 27 परिवार किराए या रिश्तेदारों के यहां रहने को विवश हैं। जिला प्रशासन ने विभिन्न स्कूलों में बनाए गए राहत शिविरों में 323 लोगों ने अस्थाई आश्रय लिया है, जिनमें प्राथमिक विद्यालय सलारपुर, प्राथमिक विद्यालय सरैया, यूनाइटेड पब्लिक स्कूल सरैया, सिटी गर्ल्स स्कूल (बड़ी बाजार), चित्रकूट कान्वेंट स्कूल (नक्खीघाट) और नवोदय स्कूल (दानियालपुर) शामिल हैं।
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने संबंधित विभागों के साथ बैठक कर राहत कार्य तेज करने का निर्देश दिया। बाढ़ राहत शिविरों की संख्या बढ़ाने और ऊंचे स्थानों की पहचान के निर्देश दिए गए। पार्षदों को निर्देशित किया गया कि वे अपने क्षेत्रों के सुरक्षित स्थलों की सूचना प्रशासन को दें। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गुरुवार को सलारपुर राहत शिविर और बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। घर के ऊपरी मंजिलों पर रुके परिवारों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। एसडीएम सदर को सभी राहत शिविरों के संचालन की नियमित निगरानी के लिए निर्देशित किया गया।

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