मुख्यपृष्ठसमाचारसम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त महोत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त महोत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न

उमेश गुप्ता / वाराणसी

भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत की गौरवशाली विरासत एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के अनुपम संगम का साक्षी बना सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षान्त महोत्सव बुधवार को संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की।
कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत और आध्यात्मिक चेतना का शाश्वत केंद्र है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों एवं गुरुजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज 11,959 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं तथा मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पारंपरिक शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन में छात्राओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। उन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन एवं संस्कृत अध्ययन से जोड़ने के लिए और अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र की प्रेरक विभूति बताते हुए उनके योगदान की सराहना की।
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष, प्रख्यात वैज्ञानिक एवं शिक्षा नीति विशेषज्ञ पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि काशी भारत की सनातन ज्ञान परंपरा का केंद्र है तथा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय उसका सशक्त संवाहक है। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायित्व ग्रहण करने का पावन क्षण है।
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि दीक्षान्त समारोह में पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धि उनकी लगन, परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान को जीवनभर स्मरण रखें तथा अपने माता-पिता के त्याग और योगदान को कभी विस्मृत न करें।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में आज का दिवस अत्यंत पावन, अविस्मरणीय एवं गौरवपूर्ण है। गुरु पूर्णिमा जैसे सनातन संस्कृति के महान आध्यात्मिक पर्व पर 44वें दीक्षान्त समारोह का आयोजन तथा राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के कुलाधिपति के रूप में सात वर्षों के यशस्वी, दूरदर्शी एवं लोककल्याणकारी कार्यकाल का पूर्ण होना इस समारोह को ऐतिहासिक गरिमा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल उपाधियों का वितरण नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान, संस्कार, साधना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का महापर्व है।
दीक्षान्त महोत्सव में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों को डिजिलॉकर के माध्यम से उपाधियां उपलब्ध कराई गईं। कुलाधिपति के करकमलों से 29 मेधावी स्नातकों को 51 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। साथ ही 44वें दीक्षान्त महोत्सव में कुल 11,959 उपाधियां एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
पीएचडी उपाधिधारियों को उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया। मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित करने के साथ ही विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के चयनित अध्यापकों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय से एक तथा महाविद्यालयों से तीन चयनित अध्यापकों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

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