सुरेश मिश्र
इस साल इतनी बारिश हुई कि नवंबर माह में ही खूब ठंड पड़ने लगी। प्रियतम मुंबई में रिक्शा चलाते हैं। सीएनजी की बड़ी प्राब्लम थी तो जगह-जगह लंबी लाइन लगानी पड़ी। एक दिन लंबी कतार में बैठे प्रियतम ने हालचाल लेने के लिए पत्नी को फोन किया तो पत्नी ने कहा-
रतिया में सेजिया पे संवरिया, सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया, सेहलावन लागे
चंदा कइ चाहत अइसन, नाहीं चकोरवा सोवइ
ओसिया परत बा लागे, पिय बिनु चंदनियां रोवइ
छुइ-छुइ चिंहुकावेला बयरिया सेहलावन लागे
रतिया में सेजिया पे संवरिया, सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया,
सेहलावन लागे
बीतल दिवाली-दसमी,
तोहरी न आइल पतिया
कंगना क ताना सुनि-सुनि
कइसे गुजारी रतिया
कमवां से घायल अहइ गुजरिया सेहलावन लागे
रतिया में सेजिया पे संवरिया, सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया, सेहलावन लागे
बिनती बा हे छठ मइया, सइयां क फेरा मतिया
तोहरा क पूजन करबइ, टारा इ साढ़ेसतिया
हमरा से फेरा जिनि नजरिया सेहलावन लागे
रतिया में सेजिया पे संवरिया, सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया,
सेहलावन लागे
न घर मा कंबल हउवे, न तउ रजाई हउवे
कइसे भरावल जाई, एतनी महंगाई हउवे
कइसे होई हो खेती-बरिया सेहलावन लागे
रतिया में सेजिया पे संवरिया, सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया, सेहलावन लागे
धनवां कइ बलिया लटकल, कइसे कटवाई सइयां
तोहरी फसलिया पाकल, कइसे बचाई सइयां
कइसे हम निसरी भला सेंवरिया सेहलावन लागे
रतिया में सेजिया पे संवरिया, सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया, सेहलावन लागे
उखिया भी राह निहारे, आखिर पेराई कइसे
चेनगा से महकइ गउवां, बोला हम खाई कइसे
समुझा हमरे दिल कइ बीमरिया सेहलावन लागे
रतिया में सेजिया पे संवरिया,
सेहलावन लागे
कबले हम जोहबइ पिया डगरिया, सेहलावन लागे
