मुख्यपृष्ठनए समाचारअयोध्या में हर्षोल्लास से संपन्न हुआ श्री राधाअष्टमी प्राक्टय महोत्सव

अयोध्या में हर्षोल्लास से संपन्न हुआ श्री राधाअष्टमी प्राक्टय महोत्सव

 सामना संवाददाता / अयोध्या

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में शनिवार को श्री राधाष्टमी का पावन पर्व बड़ी ही दिव्यता और भव्यता के साथ मनाया गया। इस्कॉन अयोध्या, पुष्प वाटिका स्थित मंदिर परिसर में आयोजित श्री राधाष्टमी महोत्सव में अयोध्या के भक्तों ने सम्मिलित होकर श्रीमती राधारानी की कृपा प्राप्त की। पूरा परिसर दिन भर “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
राधा तत्व ही प्रेम की पराकाष्ठा
गीता मनीषी देवशेखर विष्णु दास जी ने सामाजिक सौहार्द और वैश्विक प्रेम का दिव्य संदेश प्रसारित किया। उन्होंने कहा कि आज विश्व में जब स्वार्थ और अशांति बढ़ रही है, तब श्री राधारानी का जीवन हमें निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण की शिक्षा देता है। राधा भाव ही वह सेतु है जो मानव को मानव से और जीव को परमात्मा से जोड़ता है। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे राधारानी के आदर्शों को जीवन में उतार कर समाज में प्रेम और एकता का प्रसार करें।
अयोध्या में आयोजन की विशेष महत्ता
रामनगरी अयोध्या में राधाष्टमी का यह आयोजन अत्यंत विशेष महत्व रखता है। अयोध्या जहाँ मर्यादा और धर्म का प्रतीक है, वहीं बरसाना प्रेम और भक्ति का। इस्कॉन अयोध्या द्वारा आयोजित यह महोत्सव राम और श्याम के मिलन का प्रतीक बना। यह संदेश देता है कि मर्यादा और प्रेम दोनों एक ही तत्व के दो रूप हैं। सरयू तट पर राधा-कृष्ण की भक्ति का यह संगम अयोध्या की आध्यात्मिक विविधता को और अधिक समृद्ध करता है।
श्री राधारानी केवल बरसाना की लाडली नहीं, बल्कि समस्त ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी हैं।
कथा और सरयू जल से महाभिषेक बना अलौकिक क्षण
राधारानी के दिव्य कथा का सुंदर विवेचन षडभुज गौर दास जी के द्वारा हुआ।महोत्सव का सबसे दिव्य और भावुक क्षण वह रहा जब मोक्षदायिनी पावन सरयू नदी के पवित्र जल से श्रीमती राधारानी का महा-अभिषेकम् संपन्न हुआ। शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और मृदंग की मधुर ध्वनि के बीच जब सरयू जल, दूध, दही, घी, शहद और गुलाब जल से राधारानी का अभिषेक किया गया, तो उपस्थित प्रत्येक भक्त की आंखें नम और हृदय आनंद से भर उठा।
५६ भोग और प्रसाद वितरण
राधारानी को भक्तो ने ५६ भोग कि भोग अर्पण किया और उसके बाद भक्तो को प्रसाद रूप मे वितरण किया गया।

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