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मनुष्य बनने की ओर कृत्रिम बुद्धि रोबोट

-प्रमोद भार्गव
महात्मा गांधी और विनोबा भावे के अहिंसक विचारों के समर्थक ऑस्ट्रेलियाई मूल के एक दार्शनिक हुए हैं, इवान इलिच, जो अंग्रेजी के अलावा तमाम भाषाओं के साथ हिंदी भी जानते थे। इलिच का विचार था कि वाहनों ने मनुश्य के पैरों की ताकत छीन ली है। मशीनी तकनीक ने मनुष्य के हाथों के हुनर छीन लिए हैं और मनुष्य के विरुद्ध एक प्रति मनुष्य ‘रोबोट‘ के रूप में विकसित कर व्यक्ति को सीमेंट, कंक्रीट और यंत्रों के जंगल में अकेला छोड़ देने के उपक्रम हो गया है। अब ताजा जानकारियां मिल रही हैं कि ओपनएआई यानी कृत्रिम बुद्धि (एआई) आधारित रोबोट का प्रति मानव स्वरूप ऐसी हरकतें करने लगा है कि ये कंपनी प्रबंधकों के प्रतिकूल जा रही हैं। यानी ये रोबोट वास्तविक मनुष्य के आदेश का सटीक पालन नहीं कर रहे हैं। इसे विज्ञान की भाषा या रोबोट की प्रकृति के मुताबिक ‘मिसअलाईमेंट‘ कहा जा रहा है। सीधी भाशा में कहें तो यह स्थिति रोबोट द्वारा पालक व्यक्ति की आज्ञा की अवहेलना है। क्योंकि ये भूलें किसी तकनीकी खराबी की वजह से होने की बजाय एआई ने जानबूझकर कीं, जो हरकत की श्रेणी में आती हैं। ये भविष्य में खतरनाक साबित हो सकती हैं ?
रोबोट में एआई के बढ़ते प्रयोग के चलते इसके संकट में डालने वाले भाव-विचार स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। इसकी एक गलत जानकारी अमेरिका और चीन को परस्पर सैन्य टकराव के निकट ले आई थी। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान सामने आई इस घटना का पर्दाफाश अब हुआ है। दरअसल पश्चिम एशिया में मौजूद चीन के एक समुद्री जहाज को लेकर अमेरिकी सेना के सायबर सिस्टम में एक गुप्त रिपोर्ट पहुंची, जिसमें कहा गया कि चीनी जहाज में परमाणु हथियार कार्यक्रम को तैयार करने वाले कल-पुर्जे ले जाए जा रहे हैं। यह परिणाम चैटबॉट की सहायता से सामने आया था। रिपोर्ट मिलने के साथ ही अमेरिकी सेना का हरकत में आना स्वाभाविक था। अतएव जहाज को रोकने की रणनीति बनाई जाने लगी। हथियारबंद सैनिक चढ़ाई के लिए तत्पर हो गए। लेकिन यह अच्छा रहा कि हमला बोलने से पहले अधिकारियों ने एक बार फिर रिपोर्ट की गंभीर जांच कर ली। तब संज्ञान में आया कि एआई ने जहाज पर उपलब्ध कलपुर्जों की गलत पहचान कर ली थी। नतीजतन हमले की कार्यवाही पर विराम लगा दिया गया। एआई द्वारा ऐसे मामलों में सामने आ रहा है कि वे इंटरनेट द्वारा नियंत्रित अनुशासन का उल्लंघन कर रहे हैं। यानी एआई उपकरणों में इंसानी समझ और हरकत करने की इच्छाएं अंगड़ाई लेने लगी हैं। एआई की निजी पहचान निर्मित कर लेने की यह महत्वाकांक्षा भविष्य में बड़े संकट का कारण बन सकती है?
रोबोट में बुद्धि डालकर उसे हम मनुष्य का शासक बनाने में लगे हुए हैं। अभी तक रोबोट को नए-नए रूपों में विकसित करने का काम वैज्ञानिक रूपी मनुष्य करता था, लेकिन प्रौद्योगिकी के आकाश में कृत्रिम बुद्धि ने ऐसे पंख दे दिए हैं कि रोबोट अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से स्वयं अद्यतन (अपडेट) होने लगे हैं और जो जीवित रोबोट अस्तित्व में आए हैं, वे स्वयं रोबोट पैदा करने लगे हैं। रोबोट के स्वमेव परिवर्तन और नए रोबोट पैदा करने की इस ताकत के परिणाम फलदायी होने की बजाय घातक होने की आशंकाएं ज्यादा दिखाई दे रही हैं। इसीलिए एआई विशेषज्ञ आल्टमेन से लेकर एलन मस्क तक इस तकनीक को मानवता के अस्तित्व पर बड़ा खतरा मान रहे हैं।
भविष्य का रोबोट यांत्रिक-मानव भर नहीं रह जाएगा, उसे यंत्र और कृत्रिम बुद्धि के बूते एक जीवित मानव में बदलने के प्रयास हो रहे हैं, अर्थात कालांतर में जीवित रोबोट हमारे समक्ष होगा ? इस दिशा में अमेरिका के वैज्ञानिकों ने जीवित रोबोट का एक प्रतिदर्श (मॉडल) आविष्कृत भी कर लिया है। वैज्ञानिकों के एक समूह ने मेंढक के भ्रूण की जीवित कोशिकाओं को अन्य नूतन जीवन रूपों के रूप में अवतरित करने में सफलता प्राप्त कर ली है। इसे ‘एक्सर्नाबॉट्स‘ रोबोट नाम दिया गया है। इसमें न्यूनतम वजन की युक्ति (डिवाइस) के जरिए इंद्रिय बोध कराया जा सकता है। इसमें २४ संवेदी यंत्र (सेंसर) संलग्न हैं। यह मांसपेशियों की गतिविधियों और दिमागी अनुभव करके काम को अंजाम देता है। इसे तकनीकी नाम ‘एस्पर बायोनिक्स प्रोस्थेटिक हैंड‘ दिया गया है। इसे क्रियाशील बनाए रखने में एआई और क्लाउड प्रौद्योगिकी अर्थात क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक के जरिए हार्डडिस्क या ड्राइव की बजाय इंटरनेट पर उपलब्ध डाटा और प्रोग्राम ग्रहण कर लिए जाते हैं। हम जानते हैं किसी हार्डडिस्क में सूचनाओं की उपलब्धता की एक सीमा है, लेकिन सूचना अंतर्जाल में असीमित हैं। क्लाउड टेक्नोलॉजी को सरल रूप में यूं भी समझ सकते हैं कि जिस तरह से बादलों में पानी भरा होता है, उसी तरह क्लाउड (बादल) कंप्युटिंग में सूचनाएं भरी होती हैं। मसलन इस तरह का मशीनी रोबोट मानव वास्तविक मनुष्य के समानांतर प्रति मानव के रूप में खड़े होने की तैयारी में आ गए हैं।
यह अद्वितीय आविष्कार आरंभिक अवस्था में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के समन्वय से निर्मित उपकरण भर था। शुरूआत में इसकी उपयोगिता मनुष्य की पहुंच से बाहर कठिन और खतरनाक कामों से जुड़ी थी। इसके प्रभावी उत्पादकता के मद्देनजर इसमें बदलाव होते रहे और इस तकनीक को नाम दिया गया रोबोटिक्स कालांतर में डिजिटल, एआई और इंटरनेट तकनीक के समन्वय की युक्तियों से जीवित रोबोट की एक प्रजाति चलन में आ रही है, जिसे बायोनिक्स और एक्सनोबाट्स नाम दिए गए हैं। ये रोबोट मानव प्रजाति और उसकी स्वाभाविक जन्मजात बुद्धि के लिए बड़े खतरा माने जा रहे हैं।
हालांकि कृत्रिम बुद्धि के आविष्कारक निर्माता और व्यापारी के बीच अजीब विडंबना देखने में आ रही है। एक तरफ तो कंपनियां दावा कर रही है कि एआई मनुष्य की कार्य क्षमता को नए ढंग से बढ़ाएंगी। नई खोजों को गति देंगी। ये उपलब्धियां भविष्य की दुनिया को सुविधाजनक बनाने वाली साबित होंगी ? दूसरी तरफ इन्हीं कंपनियों के प्रबंधक चेतावनी दे रहे हैं कि एआई दुनिया को खतरनाक मोड़ पर ले जाने की दस्तक दे रही हैं। अब यह एआई विषेशज्ञों का ही दायित्व बनता है कि जब एआई मानव जाति के लिए खतरा है, तो वही लोग इसे नए-नए उपयोगी रूपों में आगे क्यों बढ़ा रहे हैं ? उनके लिए आर्थिक लाभ जरूरी है या मनुष्यों का अस्तित्व ?

 

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