-प्रधानमंत्री की नकल कॉमेडियन ने की, मां पर राहुल ने कोई टिप्पणी नहीं की, फिर भाजपा को नैतिकता का ठेकेदार बनने का अधिकार किसने दिया?
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पेपर लीक, रुकी भर्तियों, महंगी शिक्षा और बेरोजगारी पर सवाल उठाए, लेकिन भाजपा ने पूरी बहस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री और उनकी मां के कथित अपमान की तरफ मोड़ दिया। सवाल है, क्या यह वास्तव में मर्यादा की चिंता है कि या युवाओं के कठिन सवालों से ध्यान हटाने की रणनीति।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मिमिक्री स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने की थी। राहुल गांधी ने न तो प्रधानमंत्री की दिवंगत मां पर कोई टिप्पणी की और न उनके अपमान में कोई सीधा वक्तव्य दिया। राहुल के हंसने और संवाद में शामिल होने के वीडियो को आधार बनाकर भाजपा नेताओं और समर्थकों ने ऐसा प्रचार शुरू किया, मानो पूरा कथन राहुल का ही हो। राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति के कथन को राहुल के मुंह में डालना तथ्य नहीं, नैरेटिव निर्माण है।
तब राजनीतिक मर्यादा कहां थी?
भाजपा के मंचों, सोशल मीडिया समर्थकों और राजनीतिक अभियानों में राहुल गांधी की भाषा, चाल, पहनावे और भाषण शैली की वर्षों से मिमिक्री होती रही है। उन्हें ‘पप्पू’ बताने का संगठित अभियान चला, उनके वीडियो काटकर मजाक बनाए गए और गांधी परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की गर्इं। प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों में भी सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को लेकर कई बार तीखे तथा व्यंग्यात्मक हमले हुए हैं। तब भाजपा नेताओं ने राजनीतिक शिष्टाचार और पारिवारिक सम्मान की दुहाई क्यों नहीं दी? यदि राहुल की मिमिक्री मनोरंजन है तो मोदी की मिमिक्री अचानक राष्ट्रीय अपमान वैâसे हो गई? लोकतंत्र में सम्मान का सिद्धांत सभी पर समान रूप से लागू होगा। सिर्फ सत्ता पक्ष की सुविधा के अनुसार नहीं।
छात्रों के सवालों का जवाब कहां है?
भाजपा जिस वीडियो को लेकर आक्रामक है, उसका जवाब अब कांग्रेस से अधिक विद्यार्थी और आम नागरिक दे रहे हैं। वे पूछ रहे हैं, पेपर लीक क्यों होते हैं? खाली सरकारी पद कब भरेंगे? भर्ती परीक्षाओं के परिणाम वर्षों तक क्यों लटकते हैं? संविदा नियुक्तियां क्यों बढ़ रही हैं? पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार कहां है? मिमिक्री पर भाजपा का आक्रोश इन प्रश्नों का उत्तर नहीं हो सकता। राहुल गांधी के आरोप गलत हैं तो सरकार आंकड़ों और तथ्यों से उनका जवाब दे। कॉमेडियन के कुछ शब्द पकड़कर पूरे छात्र संवाद को अपमान की बहस में बदलना बताता है कि सत्ता युवाओं के सवालों से असहज है।
भाजपा नेताओं ने राजनीतिक शिष्टाचार और पारिवारिक सम्मान की दुहाई क्यों नहीं दी? यदि राहुल की मिमिक्री मनोरंजन है तो मोदी की मिमिक्री अचानक राष्ट्रीय अपमान कैसे हो गई? लोकतंत्र में सम्मान का सिद्धांत सभी पर समान रूप से लागू होगा, सिर्फ सत्ता पक्ष की सुविधा के अनुसार नहीं।
जनता का सवाल सीधा है, जो लोग वर्षों से गांधी परिवार का उपहास करते रहे, उन्हें अब दूसरों को राजनीतिक मर्यादा सिखाने का नैतिक अधिकार कहां से मिला?
