-एसआईआर में सिसोदिया और सिब्बल सहित ३३.१३ लाख नाम सत्यापन के घेरे में; अंतिम सूची ४ नवंबर को
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल सहित लगभग ३३.१३ लाख मतदाताओं को अपने विवरण और पात्रता की पुष्टि करनी होगी।
-एसआईआर बोले तो ‘शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल!’
-७.८ करोड़ नाम हटे, लाखों पर लटकी तलवार
-चुनाव आयोग पर कांग्रेस का हल्लाबोल
कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि एसआईआर वास्तव में मतदाताओं के नाम हटाने की एक बड़े पैमाने की `शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल’ (शाह के इशारे पर मतदाताओं के नाम हटाने की) प्रक्रिया तथा `संविधान पर हमला’ है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने जून २०२५ में बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की पहले चरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद नवंबर २०२५ में नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण शुरू किया गया।
`मेरा नाम हटाने के लिए ईसी पर दबाव डाला जा रहा!’
पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने शनिवार को `एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि उन्हें यह जानकर हैरानी हो रही है कि निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मामले को गंभीरता से उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर सकते हैं।
`क्या मैं इस देश का नागरिक नहीं हूं?’
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मतदाता सूची संबंधी नोटिस को लेकर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। सिब्बल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल दागते हुए कहा कि वर्षों से मतदान कर रहे व्यक्ति की नागरिकता पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने नोटिस को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि चुनाव आयोग के इस मनमाने रवैये के खिलाफ वे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
