मुख्यपृष्ठनए समाचारकुंभ की तैयारी में ‘नौकरी घोटाले’ की दस्तक!

कुंभ की तैयारी में ‘नौकरी घोटाले’ की दस्तक!

-महायुति सरकार में सरकारी मुहर से फर्जी नियुक्ति पत्र का खेल
-अधिकारियों के हस्ताक्षर तक की नकल, बेरोजगार युवकों को महसूल सहायक बनाने का झांसा

सामना संवाददाता / मुंबई

सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के बीच नाशिक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। कुंभ के नाम पर पहले फर्जी वर्क ऑर्डर और ठेके दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी के मामले सामने आए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में भर्ती की फर्जी विज्ञप्ति का मामला उजागर हुआ और अब सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र देने का नया मामला सामने आया है। कुंभ की तैयारियों के बीच ठगी का यह सिलसिला प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पांच पन्नों का फर्जी नियुक्ति पत्र
छत्रपति संभाजीनगर के कुछ युवकों को मालेगांव तहसील कार्यालय में महसूल सहायक पद पर नियुक्त किए जाने का पांच पन्नों का फर्जी नियुक्ति पत्र दिया गया। इस फर्जीवाड़े में नाशिक जिलाधिकारी कार्यालय, मंत्रालय के सामान्य प्रशासन विभाग तथा राजस्व एवं वन विभाग की कथित सरकारी मुहरों और अधिकारियों के हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। ठगों ने सरकारी दस्तावेजों की ऐसी नकल तैयार की, जिससे बेरोजगार युवकों को नियुक्ति वास्तविक होने का भरोसा हो जाए। सरकारी विभागों के नाम, मुहर और अधिकारियों के हस्ताक्षर इस्तेमाल किए जाने से फर्जी नियुक्ति पत्र की गंभीरता और बढ़ गई है।
जिलाधिकारी कार्यालय में मचा हड़कंप
इस मामले में नाशिक जिलाधिकारी कार्यालय की स्थापना शाखा में सहायक महसूल अधिकारी प्रदीप श्याम मोठे ने सरकारवाड़ा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जीवाड़े
सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन की तैयारियों के बीच सरकारी विभागों के नाम, मुहर और अधिकारियों के हस्ताक्षर तक इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए जा रहे हैं, यह सवाल अब उठने लगा है। कुंभ कार्यों के नाम पर पहले ही फर्जी वर्क ऑर्डर के कई मामले सामने आ चुके हैं। अगस्त में कुंभ की भर्ती के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की फर्जी विज्ञप्ति भी सामने आई थी। करोड़ों रुपए के कुंभ कार्यों के बाद अब सरकारी नौकरी भी ठगों के निशाने पर आ गई है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सिंहस्थ की तैयारियों के बीच प्रशासनिक निगरानी और दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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