-सिंहस्थ बैठक में हंगामा, त्र्यंबकराज की प्रतिकृति पर त्रिपुंड न होने से भड़के हरिगिरी महाराज
-‘संतों को पूछे बिना फैसले’ का आरोप, बैठक छोड़ने की कोशिश से गरमाया माहौल
सुनील ओसवाल / मुंबई
सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों को लेकर शनिवार को बुलाई गई बैठक में उस समय माहौल गरमा गया, जब जूना अखाड़े के प्रमुख महंत हरिगिरी महाराज ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई। कुंभमेले के मंत्री गिरीश महाजन की मौजूदगी में ही उन्होंने साधु-संतों को विश्वास में लिए बिना निर्णय लिए जाने का आरोप लगाया और बैठक से बाहर जाने की कोशिश की। इससे कुछ देर के लिए बैठक में तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
विवाद की शुरुआत त्र्यंबकेश्वर के बेझे क्षेत्र में प्रस्तावित भगवान त्र्यंबकराज की ३१ फुट ऊंची पंचधातु पंचमुखी प्रतिमा की प्रतिकृति को लेकर हुई। बैठक में रखी गई प्रतिकृति पर त्रिपुंड नहीं होने पर हरिगिरी महाराज ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने से पहले साधु-महंतों को विश्वास में लेना जरूरी है।
‘त्र्यंबकेश्वर को पीछे क्यों?’
प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद जल्द ही सिंहस्थ के व्यापक नियोजन तक पहुंच गया। संतों की ओर से आरोप लगाया गया कि सिंहस्थ के महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र त्र्यंबकेश्वर के विकास कार्यों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है। उनका कहना था कि नासिक में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
महाजन को करना पड़ा हस्तक्षेप
हरिगिरी महाराज के बैठक से बाहर जाने की कोशिश के बाद स्थिति संभालने के लिए मंत्री गिरीश महाजन को हस्तक्षेप करना पड़ा। महाजन ने संतों को आश्वस्त किया कि उनकी आपत्तियों और सुझावों को उचित महत्व दिया जाएगा। बाद में महाजन ने स्पष्ट किया कि हरिगिरी महाराज की आपत्ति प्रतिकृति बनाए जाने को लेकर नहीं थी, बल्कि उन्हें इसकी जानकारी पहले नहीं दिए जाने को लेकर थी। उनके अनुसार प्रतिमा की डिजाइन और उससे जुड़ी जानकारी पहले संतों के समक्ष रखी जानी चाहिए थी।
