– गूगल के पूर्व सीईओ एरिक श्मिट की चेतावनी
-पांच वर्षों में इंसानी समझ से आगे निकल सकता है एजेंटों का आपसी संवाद
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती ताकत के बीच गूगल के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट की एक चेतावनी फिर चर्चा में है। श्मिट ने ऐसी संभावित स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें लाखों एआई एजेंट आपस में संवाद करते हुए अपनी अलग संचार-प्रणाली विकसित कर लें और इंसानों के लिए यह समझना कठिन हो जाए कि वे क्या कर रहे हैं। उनका सवाल था यदि ऐसा हुआ तो क्या मनुष्य को सिस्टम का ‘प्लग खींचना’ पड़ेगा? हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा एआई नियंत्रण से बाहर हो चुका है। श्मिट ने इसे भविष्य की एक सशर्त आशंका के रूप में रखा था। उनका अनुमान था कि पांच से दस वर्ष नहीं, बल्कि लगभग पांच वर्षों के भीतर एआई एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। श्मिट की टिप्पणी का संदर्भ…तीन बदलाव बढ़ाएंगे एआई की ताकत
श्मिट के मुताबिक, एआई में तीन बड़े तकनीकी परिवर्तन एक साथ हो रहे हैं। लंबी जानकारी याद रखने वाले कॉन्टेक्स्ट विंडो, स्वतंत्र रूप से काम करने वाले एआई एजेंट और सामान्य भाषा में दिए निर्देश से सॉफ्टवेयर तैयार करने की क्षमता।
अभी एआई मुख्यतः किसी सवाल का जवाब देता है, लेकिन भविष्य का एजेंट किसी जटिल समस्या को चरणबद्ध तरीके से हल कर सकेगा। वह पहला कदम उठाएगा, परिणाम का विश्लेषण करेगा और उसके आधार पर अगला फैसला लेगा। इस प्रकार एआई हजार चरणों वाली प्रक्रिया को भी संभाल सकता है।
इसका इस्तेमाल दवाओं की खोज, चिकित्सा अनुसंधान, नई सामग्री विकसित करने, जलवायु मॉडल बनाने और वैज्ञानिक समस्याओं को हल करने में हो सकता है। श्मिट की सबसे बड़ी चिंता किसी एक शक्तिशाली एआई से अधिक लाखों एजेंटों के आपसी सहयोग को लेकर है। अलग-अलग एजेंट विशेषज्ञ की तरह समस्याओं पर काम करेंगे, निष्कर्ष साझा करेंगे और अगला कदम तय करेंगे। खतरे की सीमा तब शुरू होगी, जब उनका संवाद इंसानी निगरानी और व्याख्या से बाहर चला जाए।
