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झांकी: आवारा और बहरी सरकार

अजय भट्टाचार्य

प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया ने कहा था, ‘जब सड़कें खामोश हो जाएं तो संसद आवारा हो जाती है।’ अर्थात लोकतंत्र में यदि जनता अपने अधिकारों के लिए सजग नहीं रहती और गलत नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण विरोध (आंदोलन) करना बंद कर देती है, तो सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधि निरंकुश और लापरवाह हो सकते हैं। भारत का वर्तमान सत्ता प्रतिष्ठान आवारा ही नहीं बहरा भी हो गया है इसलिए सड़कों पर उतरना जरूरी है। परसों दिल्ली ही नहीं देशभर में छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक सड़कों पर थे। शायद सरकार तक यह गूंज नहीं पहुंची! आंदोलन, प्रदर्शन और जुलूस अराजकता के प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध जागरूक नागरिक की अंतिम पुकार हैं। जब संवाद के दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब संघर्ष इतिहास लिखता है। संसद छोड़कर भागने से इतिहास नहीं बनता!
`विश्वगुरु’ के देश में
चीन अपने छात्रों को सभी जरूरी सुविधाएं और विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए पैसे देता है। रूस अपने छात्रों को पुस्तकालय और सस्ती शिक्षा देता है। ब्रिटेन उच्च शिक्षा और शोध की सुविधाएं प्रदान करता है। अमेरिका-नौकरियां और ईरान अच्छी तालीम व पीएचडी तक की डिग्री हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है। और हमारी सरकार लाइब्रेरियों में पढ़ते छात्रों पर पुलिस और गुंडों के द्वारा हमले कराती है, उन्हें देशद्रोही कहती है, विश्वविद्यालयों/ मेडिकल कालेजों को गिराती/बंद करवाती है। उनकी परीक्षाओं के पेपर्स बार-बार लीक होने से नहीं रोक पाती रद्द परीक्षाएं फिर से कराने के लिए फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलती है और जब बच्चे न्याय मांगते हैं तो उन्हें पिटवाती है। क्योंकि हम विश्वगुरु हैं…!
नशे की शपथ
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न के राजमाता चुनकुमारी स्टेडियम में पुलिस ने नशे के खिलाफ एक बड़ा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में जिले भर से आए २०० से अधिक छात्र-छात्राएं मौजूद थे। भाजपा विधायक रामनिवास शाह नशामुक्ति की शपथ दिलाने मंच पर पहुंचे। विधायक जी हाथ में बकायदा सरकारी शपथ पत्र लेकर उसे देखकर पढ़ रहे थे। उन्होंने शुरुआती अधिकांश पंक्तियां तो बिल्कुल सही पढ़ीं, लेकिन जैसे ही मुख्य वाक्य पर आए, उनके मुंह से `नहीं’ शब्द गायब हो गया। उन्हें बोलना था कि `मैं जीवन में कभी नशा नहीं करूंगा’, लेकिन उन्होंने कह दिया, `मैं शपथ लेता हूं कि मैं जीवन में कभी नशा करूंगा।’ बच्चे मुस्कराए बिना नहीं रह सके।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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