मुख्यपृष्ठस्तंभविशेष: नया ‘जन सुविधा केंद्र’ या पुराना ‘जन दुविधा केंद्र’?

विशेष: नया ‘जन सुविधा केंद्र’ या पुराना ‘जन दुविधा केंद्र’?

-फरियाद फिर उसी कसाई के पास, न्याय अब भी बिकाऊ

डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी

जौनपुर कलेक्ट्रेट में बुधवार को डीएम सैमुअल पॉल एन. और एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने सुबह ८ से रात १० बजे तक चलने वाले ‘जन सुविधा केंद्र’ का ढोल पीटकर शुभारंभ कर दिया। दावा है कि शिकायत दर्ज होते ही व्हाट्सऐप से लेखपाल-कानूनगो को अलर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, रोस्टरवार कर्मचारी, पुलिस की डबल शिफ्ट आदि। डीएम ने लापरवाह अफसरों का ‘काला चिट्ठा’ बनाने की धमकी भी दे डाली।
पर सवाल खून जमा देने वाला है कि क्या यह भी ‘ढाक के तीन पात’ साबित होगा। जनसुनवाई पोर्टल, CM हेल्पलाइन, PMO-PG, थाना-तहसील दिवस हर ‘समाधान’ का मंच पहले भी बना है। नतीजा? पोर्टल पर ‘निस्तारित’ का ठप्पा और जमीन पर पीड़ित की लाश सड़ती रही।
असली कोढ़ है ‘आरोपी ही जांच अधिकारी’ का नंगा खेल। जनता दर्शन में CM योगी के हाथ में दिया पत्र हो या PMO की गुहार, हर फरियाद घूमकर उसी थाने, तहसील, ब्लॉक में दफन हो जाती है, जहां अत्याचारी धनबली मठाधीशों का साम्राज्य है। जांच उसी भ्रष्ट CO, SDM, दरोगा, लेखपाल,BDO, BSA के हवाले, जिस पर रिश्वत और गुंडागर्दी के आरोप हैं। वह फर्जी रिपोर्ट ठोंकता है, उल्टा पीड़ित को झूठे केस में फंसा देता है या ‘कागजी निस्तारण’ का ढोंग रच देता है।
इसके पीछे वही ‘इच्छाधारी मठाधीश’ हैं, जो हर सरकार में पाला बदलकर सत्ता की मलाई चाटते हैं। सरकार किसी की हो, इनका दबदबा अमर है। स्थानीय दलाल जनप्रतिनिधियों को घूस खिलाकर हर फाइल खरीद ली जाती है। भ्रष्टाचार का रेट-कार्ड खुला है – गरीब का खून चूसना और सरकारी खजाना लूटना ही एक मात्र मकसद है। नीचे सिपाही से ऊपर मंत्री तक हर टेबल का परसेंट फिक्स है।
रात १० बजे तक शिकायत लेने से क्या होगा, जब सुबह १० बजे वही भेड़िया फाइल दबा देगा? मुख्यमंत्री जी, आप जनता दर्शन में सिर झुकाकर फरियाद सुनते हो, पर अगली सुबह वही पत्र उसी कसाई के पास पहुंच जाता है। जब तक ‘क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच’ अनिवार्य नहीं होगी, आरोपी अफसर को लात मारकर बाहर नहीं फेंका जाएगा, वीडियो रिकॉर्डिंग और पब्लिक ट्रैकिंग नहीं होगी, तब तक नया जन सुविधा केंद्र भी पुराने पोर्टलों की तरह कागजी शेर ही रहेगा। पहले थाना-तहसील-ब्लॉक का कोढ़ काटो, वरना ‘रामराज्य’ का ढोल पीटना बंद करो।

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