सना खान
स्कूल की एक कक्षा में रिया नाम की लड़की हमेशा आखिरी बेंच पर बैठती थी। वह न तो सबसे ज्यादा बोलती थी और न ही दोस्तों की भीड़ का हिस्सा थी। सवालों के जवाब जानने के बावजूद वह हाथ उठाने से डरती थी। उसे लगता था कि अगर उसकी आवाज कांप गई या जवाब गलत हो गया तो लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। धीरे-धीरे उसने खुद को भीड़ में छिपाना सीख लिया। कुछ लोग उसे शर्मीली कहते, तो कुछ उसकी क्षमताओं पर सवाल उठाते। बार-बार सुनने को मिलने वाला वाक्य, ‘इससे कुछ नहीं होगा’ उसके मन में घर कर गया था।
लेकिन किसी ने उसकी मेहनत नहीं देखी। हर रात वह देर तक पढ़ाई करती और अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश करती। उसकी सबसे बड़ी लड़ाई दूसरों से नहीं, बल्कि खुद के भीतर बैठे डर और आत्मविश्वास की कमी से थी। वह रोज खुद को समझाती कि वह भी उतनी ही काबिल है जितने बाकी लोग। समय बीतता गया। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई और जीवन की असली चुनौतियां सामने आने लगीं। रिया को कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। इंटरव्यू में रिजेक्शन मिला, उसकी मेहनत को नजरअंदाज किया गया और कई बार उसका आत्मविश्वास भी टूट गया। कुछ पल ऐसे आए जब उसे लगा कि शायद दुनिया सही कहती थी। लेकिन हर बार उसके भीतर की उम्मीद उसे फिर खड़ा कर देती। रिया ने धीरे-धीरे अपने डर का सामना करना सीखा। उसने बोलना, अपनी बात रखना और असफलताओं के बाद भी आगे बढ़ना सीखा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने खुद पर विश्वास करना सीख लिया। यही विश्वास उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। सालों बाद उसके स्कूल में एक समारोह आयोजित हुआ। पुराने छात्रों को सम्मानित करने के लिए बुलाया गया। जब मंच पर रिया का नाम पुकारा गया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कभी आखिरी बेंच पर बैठने वाली वह लड़की आज अपने क्षेत्र में एक सम्मानित पहचान बन चुकी थी। कार्यक्रम के बाद उसकी मुलाकात अपने पुराने शिक्षक से हुई। शिक्षक ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ थामा और कहा, ‘मुझे तुम पर गर्व है।’ ये चार शब्द सुनकर रिया की आंखें नम हो गर्इं। उस पल उसे एहसास हुआ कि असली जीत ट्रॉफियों में नहीं, बल्कि संघर्षों को पार करके खुद को साबित करने में होती है। उसने समझ लिया कि आखिरी बेंच पर बैठी वह लड़की कभी पीछे नहीं थी, वह सिर्फ अपने सही समय का इंतजार कर रही थी। जीवन की यही सच्चाई है कि दुनिया अक्सर सफलता देखती है, संघर्ष नहीं। इसलिए किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी वर्तमान स्थिति से नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर शांत इंसान के भीतर एक अनकही कहानी और एक बड़ी संभावना छिपी हो सकती है।
