विमल मिश्र
मुंबई
मुंबई की लोकल ट्रेनें मायने, सब्र, साहस और सह अस्तित्व की पाठशाला। यहां आपका आवागमन, हिलना-डुलना व खिसकना अनैच्छिक है। आपका काम है बस, गाड़ी में चलते जाना। डिब्बे के आगे खड़े हों तो अपने आप चढ़ जाएंगे, उतरना हो तो भीड़ के धक्के खुदब-खुद उतार देंगे। पर, जापान की लोकल, यानी वहां की मेट्रो रेल की भीड़ का आलम यह है कि यहां आपको ट्रेन के भीतर धकेलने के लिए बाकायदा अलग से रेल कर्मचारी होते हैं।
पैसेंजर पुशर्स
टोक्यो के ‘पीक ऑवर्स’ भी लगभग वहीं हैं, जो हमारी मुंबई के। सुबह पांच बजे से शुरू यह भागदौड़ रात १२ बजे तक जारी रहती है। सुबह ७.३० से ९.३० बजे और शाम पांच से रात आठ बजे जापान के व्यस्त मेट्रो स्टेशनों पर लोड इतना बढ़ जाता है कि कभी-कभी यात्रियों को कोच के भीतर धकेलने के लिए सफेद दस्ताने पहिने ‘ओशिया’ या ‘पैसेंजर पुशर्स’ की मदद लेने पड़ती है, ताकि ट्रेन के ऑटोमैटिक डोर बंद हो सकें। ऐसी व्यवस्था करने वाली इकलौती है टोक्यो मेट्रो।
मुंबई में मध्य और पश्चिम रेल की रोजाना कुल ३,१४१ सेवाओं में (मेट्रो ट्रेनों की लगभग ४०० और) जिनमें रोजाना ८० लाख यात्रा करते हैं, अनुमानत: १,२०० लोगों के लिए निर्धारित जगह को कम से कम ४,५०० से ज्यादा लोग घेरे हुए होते हैं। इनमें मेट्रो ट्रेनों के १० लाख और मिला दें तो ९० लाख। पर, टोक्यो में भीड़ मुंबई से मामूली ज्यादा (एक करोड़) भले हो, पर उसे संभालने के लिए ट्रेनें अधिक हैं उससे आठ गुना ज्यादा। टोक्यो २६,००० ट्रेनों और ५५७ किलोमीटर लंबे नेटवर्क के साथ विश्व में सबसे बड़ा सबर्बन नेटवर्क है, जबकि मुंबई के लोकल ट्रेन नेटवर्क की लंबाई लगभग ४५१ किलोमीटर (मेट्रो ट्रेनों के १०१ किलोमीटर नेटवर्क सहित ५५२ किलोमीटर) है। रेलवे एशिया में सबसे पहले (१८५३) मुंबई में आई थी, पर विलंबित शुरुआत (१८७२) के बावजूद जापान आज रेलवे नेटवर्क के लिहाज से सबसे विकसित देशों में से हैं। टोक्यो, क्योटो, नागोया, हिरोशिमा, सपोरो, फुकुओका और योकोहामा सरीखे प्रमुख शहरों में दैनिक आवागमन की जीवन रेखा मेट्रो ट्रेनें ही हैं। जापान अपने शहरी परिवहन के लिए उन्नत मोनो और सस्पेंडेड हैंगिंग ट्रेनों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। अंतर-शहरी यात्रा के लिए जहां विश्व प्रसिद्ध शिंकानसेन बुलेट ट्रेनें हैं तो अत्याधुनिक मैग्लेव ट्रेनें (श्aुतन्) दस्तक देने को तैयार, जो हवा में चुंबकीय बल से तैरते हुए ६०० किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक की रफ्तार पकड़ लेंगी।
जापान की मेट्रो लाइनों का नक्शा देखकर एक बार आपका दिमाग चकरा जाएगा। मेट्रो मार्ग पर प्रत्येक लाइन को अक्षर और रंगों के हिसाब से दिखाया गया है। टोक्यो मेट्रो दुनिया का सबसे व्यस्त मेट्रो नेटवर्क है। टोक्यो, क्योटो और ओसाका जैसे शहरों में ढेरों मेट्रो लाइनें हैं। अकेले टोक्यो में ही तेरह। चाहे आप हवाई जहाज से क्योटो आ रहे हों या बुलेट ट्रेन से प्रवेश का आपका मुख्य द्वार संभवत: मेट्रो स्टेशन ही होगा। चूंकि ये स्टेशन आपस में उपनगरीय निजी रेलवे और जेआर (जापना रेलवेज) लाइनों से सीधे जुड़े हुए हैं, इसलिए यात्रियों को ट्रेन बदलने के लिए बार-बार उतरना नहीं पड़ता। जापान ने कभी भी किराए पर समझौता नहीं किया, यानी मेट्रो में कोई भी सुविधा मुफ्त नहीं है। मुंबई में लोकल का किराया पांच रुपए से ३५ रुपए के बीच (मेट्रो ट्रेन के लिए १० से ८० रुपए) होता है। इस लिहाज से जापान की मेट्रो आपको महंगी (१८० से ३२० येन) लग सकती है। सुविधाओं ही नहीं, खूबसूरती के लिहाज से भी जापान के मेट्रो स्टेशन विलक्षण हैं। टोक्यो, ओसाका और क्योटो स्टेशनों की खूबसूरती देखकर तो आप दंग रह जाएंगे, पर हमारे अपने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की खूबसूरती से उनकी तुलना नहीं की जा सकती।
मेट्रो में बार-बार टिकट खरीदने की जहमत नहीं, बस, सिस्टम में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय सुइका प्रीपेड स्मार्ट कार्ड टैप कर दीजिए, किराया अपने आप कट जाएगा। अगर निर्धारित किराए से अधिक दूरी तय करते हैं या किराया गलत भी हो जाए तो चिंता न करें, क्योंकि स्टेशनों पर दरवाजों के पास पीले रंग की किराया एडजस्टमेंट मशीनें लगी होती हैं। बुलेट ट्रेन से एक बार जब हम शिनागावा स्टेशन पर उतरे तो मोबाइल का चार्ज खत्म हो जाने के कारण अपना कोड स्वैâन नहीं कर सके, तब संबंधित रेल कर्मचारियों ने उसे तुरंत चार्ज कर तत्परता से हमारी मदद की।
जापान की यात्रा से जुड़े हर पहलू के लिए कई ट्रैवल ऐप्स उपलब्ध हैं, जो आपकी यात्रा को सुविधाजनक बनाते हैं। स्टेशनों पर टिकट वेंडिंग मशीन से आप पेपर टिकट खरीद सकते हैं, जिसे प्रवेश के समय एक स्लॉट में डालते हैं और वह दूसरी तरफ से तुरंत बाहर आ जाता है। पर्यटक हैं तो मेट्रो स्टेशनों की टिकट मशीनों पर एक बार का सिंगल टिकट या एक, दो या तीन दिनों की असीमित यात्रा वाले टिकट खरीदने का विकल्प है। ऊपरी बाएं कोने में अंग्रेजी मार्गदर्शन वाला बटन दबाकर आप अपने कार्ड या मोबाइल को मनमाफिक चार्ज कर सकते हैं। मेट्रो और बसों में असीमित यात्रा की सुविधा वाले साइट-सीइंग पास कार्ड भी हैं। हमने उतरते ही टोक्यो हवाई अड्डे पर रिचार्जेबल सुइका प्रीपेड स्मार्ट कार्ड बनवा लिया था। उसमें जो पैसा बचा रहा, वह लौटते वक्त खरीदारी के काम आ गया। इन्हें वेंडिंग मशीनों या हर कुछ दूरी पर मौजूद कन्वीनियेंस स्टोर्स पर भी टैप करने का विकल्प है। उपयोग के बाद कार्ड लौटाकर आप अपनी जमा राशि भी वापस पा सकते हैं। ध्यान रहे, टिकट खरीदते समय या अपने प्रीपेड कार्ड को टॉप अप करते समय आपको नकद भुगतान करना होगा। क्रेडिट कार्ड का उपयोग आप कर सकते हैं, पर केवल पास खरीदने के लिए। कुछ मशीनें ५,००० और १०,००० येन जैसे बड़े नोट स्वीकार नहीं करती हैं।
जापानी अपनी भाषा को लेकर बहुत आग्रही हैं, इसलिए वहां जापान में भाषा की दिक्कत हर थोड़ी देर में महसूस होती है। पर, ट्रैफिक और मेट्रो में लगे संकेत अंग्रेजी में भी होते हैं।
इसी तरह भीतर की स्क्रीन भी। हमने स्टेशनों पर और मेट्रो के भीतर जापानी के साथ अंग्रेजी में भी घोषणाएं होती देखीं। स्टेशन के भीतर नीले रंग के ओवरहेड संकेत आपको ट्रेन लाइनों की ओर निर्देशित करेंगे और पीले रंग के संकेत आपको विभिन्न प्रवेश और निकास मार्गों तक ले जाएंगे। विदेशी पर्यटकों के लिए जापान के स्टेशनों और टिकट मशीनों पर जापानी के साथ-साथ अंग्रेजी, चीनी और कोरियाई भाषाओं में गाइड और नक्शे उपलब्ध हैं। मेट्रो गाइड और टूरिस्ट इन्फार्मेशन डेस्क आपको मेट्रो का नक्शा, मेट्रो के उपयोग की जानकारी और विभिन्न दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने में मदद करेगा। अगर इंटरनेट एक्सेस या डेटा इस्तेमाल करने को लेकर थोड़ी भी चिंता है, तो स्टेशनों का नक्शा देने वाली इस पीडीएफ फाइल को डाउनलोड कर लें। दूरी कम है तो कदमताल करें। लगभग ढाई पखवारे की जापान यात्रा में हमें रोजाना औसतन छह-सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)
