हिमांशु राज़
अभिनेत्री सूरजासिखा दास कहती हैं कि असली दोस्त वही होते हैं जो आपके साथ खुशियों और दुख दोनों में खड़े रहते हैं। अभिनेत्री, जो फिलहाल ‘गुटर गु’ सीज़न 3 में नजर आ रही हैं और इससे पहले फिल्म ‘मां’ में भी दिख चुकी हैं, मानती हैं कि वे उन दोस्तों को बहुत संजोकर रखती हैं जिन्होंने हर हाल में चुपचाप उनका साथ दिया है।
“मैं फ्रेंडशिप डे पर बहुत कुछ नहीं करती, लेकिन जो लोग साथ रहे हैं, सिर्फ हंसी में नहीं, बल्कि चुप्पी में भी, उन्हें दिल से cherish करती हूं। मैं पोस्ट या दिखावा नहीं करती, लेकिन वो कुछ लोग, जिनके साथ घर जैसा एहसास होता है, उन्हें मैं बहुत मानती हूं। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, दोस्तियां खत्म नहीं होतीं, बस शांत, गहरी और कम हो जाती हैं। भीड़ का पीछा करना छोड़ देते हैं और अपनी एनर्जी को प्रोटेक्ट करने लगते हैं,” वे कहती हैं- मनोरंजन इंडस्ट्री में रिश्तों के बारे में बात करते हुए सूरजासिखा मानती हैं कि यहां सच्ची दोस्ती बनाना आसान नहीं है। “ये मुश्किल है; असंभव नहीं, पर बहुत कम होता है। ये इंडस्ट्री बहुत प्रतिस्पर्धात्मक है और लोग अक्सर अपने ही काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि असली बॉन्डिंग बनाना मुश्किल हो जाता है। हर कोई अपने लिए सोचता है, और बहुत ग्रुपिज़्म है। लेकिन मैंने समझ लिया कि असली दोस्ती जबरदस्ती नहीं हो सकती। अगर होनी है तो अपने आप होगी। अच्छे लोग मिलते हैं, लेकिन यहाँ सच्ची दोस्ती पाना बहुत मुश्किल है,” वो बताती हैं।
दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के बारे में वे कहती हैं, “मेरे लिए सबसे अच्छा वक्त दोस्तों के साथ घर पर बिताना है। एक ऐसी जगह जहाँ आपको परफॉर्म करने की ज़रूरत नहीं, जहाँ चुप्पियाँ भी सुकून देती हैं। ना कोई दबाव, ना कोई दिखावा—बस जैसे आप हैं, वैसे रहना। वही असली कनेक्शन है मेरे लिए।”
सूरजासिखा आज भी अपने बचपन की दोस्तियों को बेहद मजबूती से थामे हुई हैं। “हाँ, मैं आज भी स्कूल और कॉलेज के दो-तीन दोस्तों से जुड़ी हुई हूं। हम रोज बात नहीं करते, कभी-कभी महीनों बात नहीं होती, लेकिन मुझे पता है कि अगर मैं रात के 3 बजे भी कॉल करूं, तो वो फोन उठाएंगे। यही वो बंधन है जिसे हर पल निभाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।”
वो आगे कहती हैं, “पहले दोस्ती बहुत आसान थी। बात करने, मिलने से पहले कभी इतना नहीं सोचना पड़ता था। अब लगता है हर बार रुककर सोचना पड़ता है, ज़्यादा फॉर्मेलिटी है, ज़्यादा परतें आ गई हैं।”
अपने पहले सच्चे दोस्त के बारे में सूरजासिखा घर की ओर रुख करती हैं। “वैसे, मेरी माँ (निरु) ने दोस्ती का पैमाना बहुत ऊंचा कर दिया है। उन्होंने ही मुझे सिखाया कि असली दोस्ती कैसी होती है—बिल्कुल बिन शर्त, ईमानदार और हमेशा मददगार। मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन वह मेरी पहली और हमेशा की दोस्त हैं,” वे कहती हैं।
