कविता श्रीवास्तव
वर्ष १९७१ में फिल्म आई थी `कल, आज और कल’ और इस फिल्म का एक गाना था…
`जब हम होंगे ६० साल के,
और तुम होगी पचपन की;
बोलो प्रीत निभाओगे ना,
तब भी अपने बचपन की…’
यह गीत राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर और चुलबुली अभिनेत्री बबीता पर फिल्माया गया था। आज ५४ वर्षों बाद वही गीत आज उन्हीं दोनों पर उनके असली जीवन में अपने शब्दों को चरितार्थ करता लग रहा है। इस फिल्म के रिलीज के साल में ही रणधीर कपूर और बबीता का प्रेम विवाह संपन्न हुआ, जो फिल्मी दुनिया का बड़ा चर्चित विवाह रहा। विवाह के १७ वर्षों बाद दोनों में नहीं जमी और १९८८ से वे अलग रहने लगे। उनकी दोनों बेटियां करिश्मा और करीना कपूर अपनी मां बबीता के साथ रहीं। बड़ी होकर दोनों ने फिल्मी दुनिया में अपनी प्रतिभा का जलवा दिखाया। आज जो खबर चर्चा में है, वो ये है कि कपूर परिवार के वर्तमान वरिष्ठतम व अपने दौर के व्यस्त अभिनेता रणधीर कपूर और उनके ही दौर की लोकप्रिय अभिनेत्री व उनकी पत्नी बबीता लगभग ३७ वर्ष बाद पुन: साथ रहने को सहमत हुए हैं। पति-पत्नी की इस जोड़ी के प्रेम विवाह के पश्चात संबंधों में जो दरार आई थी, उसे पाटने की कोशिशें अब जाकर सफल हुई हैं। यह करिश्मा किया उनकी बेटियों करीना और करिश्मा ने। ये दोनों ही प्रतिष्ठित कपूर खानदान की पहली बेटियां रहीं, जिन्होंने फिल्मी जगत में अपना करियर बनाया। इन दोनों के प्रयासों से उनके माता-पिता उम्र की इस दहलीज पर पहुंचने के बाद एक-दूसरे का हाथ थामकर जीवन को आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। प्रेम कहानी, प्रेम विवाह, पारिवारिक रिश्ते और उसके टूटने-जुड़ने कि यह कहानी बिल्कुल फिल्मी कहानी सी लगती है, लेकिन यह एक हकीकत है। फिल्मी दुनिया ही नहीं, आम जीवन में भी एक-दूसरे से बिछड़ने, परिवार टूटने और दूरी बढ़ने का चलन समाज में वर्षों से बना हुआ है। लेकिन इस तरह अपनी दूरियां कम करके परिवार को पुन: स्थापित करने का यह प्रयास वाकई प्रशंसनीय है। समाज में पति-पत्नी ही नहीं, अनेक रिश्तो में गलतफहमियों, परस्पर इगो और बर्दाश्त करने की क्षमताओं की कमी होने की वजह से रिश्तों में खटास जरूर आती है। लेकिन उन्हें मिटाने के लिए भी सकारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। यह बात लोगों के लिए प्रेरणादायी है। परिवार और समाज एक-दूसरे से बिछड़ने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे का साथ और हाथ में हाथ लेकर चलने से नई दिशा पाते हैं। आपसी गलतफहमियों को मिटाने से ही प्रगति के नए रास्ते खुलते हैं। परस्पर प्रीत निभाने की राह पर गति बढ़ती है और चेहरे पर पुरानी रौनक भरी मुस्कान लौट आती है। यही बात रणधीर-बबीता पर फिल्माए इस गीत में भी है…
आप यहां आए किसलिए,
आपने बुलाया इसलिए;
आए हैं तो काम भी बताइए,
पहले जरा आप मुस्कुराइए।
