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अमेरिका में हिंदुस्थानी पुरुष की अस्मत पर आई आंच…कॉर्पोरेट में भी ‘सेक्स स्लेव’!

-वॉल स्ट्रीट में स्कैंल-कंपनी पर मुकदमा…महिला अधिकारी ने नकारे आरोप

एजेंसी / न्यूयॉर्क

अमेरिका के बैंकिंग जगत में एक बड़े वित्तीय संस्थान से जुड़ा एक सनसनीखेज मुकदमा चर्चा में है। संस्थान से जुड़े एक पूर्व निवेश बैंकर ने न्यूयॉर्क की अदालत में दायर मुकदमे में स्ंस्थान की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी पर यौन उत्पीड़न, दबाव और करियर को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में आया, क्योंकि वॉल स्ट्रीट में यौन उत्पीड़न के मामलों में आम तौर पर पुरुष वरिष्ठों पर आरोप लगते रहे हैं, जबकि इस केस में आरोप एक महिला अधिकारी पर लगाए गए हैं।
कोई प्रमाण नहीं मिला
बैंक और संबंधित अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। बैंक का कहना है कि उसने आंतरिक जांच की, लेकिन आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं मिला। बैंक ने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता ने जांच में सहयोग नहीं किया और जरूरी तथ्य उपलब्ध नहीं कराए। आरोपी महिला के वकीलों ने भी कहा है कि उनके और शिकायतकर्ता के बीच कोई रोमांटिक या यौन संबंध नहीं था।
समझौता प्रस्ताव
रिपोर्टों के मुताबिक, मुकदमा सार्वजनिक होने से पहले बैंक ने शिकायतकर्ता को लगभग १० लाख
डॉलर (साढ़े ९ करोड़ रुपए) का समझौता प्रस्ताव दिया था। बैंक का कहना है कि यह प्रस्ताव आरोप स्वीकार करने के लिए नहीं, बल्कि लंबी मुकदमेबाजी, खर्च और प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान से बचने के लिए था। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इस मामले को कॉर्पोरेट अमेरिका में संवेदनशील शिकायतों को निपटाने की रणनीति से जोड़ा है।
अमेरिकी बैंकिंग सेक्टर में भूचाल…२ गवाह कर सकते हैं यौन शोषण की पुष्टि!

अमेरिका के एक बड़े बैंक में यौन शोषण का मामला इन दिनों गर्म है। बैंक की एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने कनिष्ठ पुरुष अधिकारी का कथित यौन शोषण किया। मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पुरुष अधिकारी ने संशोधित शिकायत में दावा किया कि दो गवाह उनके कुछ आरोपों की पुष्टि कर सकते हैं। हालांकि, इन कथित गवाहों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। यह मामला अभी अदालत में है, इसलिए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन इसने कार्यस्थल पर जबरन शारीरिक-संबंध, लैंगिक पूर्वाग्रह, शिकायतों की जांच, गोपनीय समझौतों और सोशल मीडिया ट्रायल जैसे कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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