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मुस्लिम वर्ल्ड: कभी एक मिसाइल को तरसता था ईरान! अब अच्छे-अच्छों को पिला दिया पानी?

सूफी खान

ईरान-इराक जंग के दौर का एक वाकया अक्सर चर्चा में रहता है कि जब सद्दाम हुसैन की फौज ईरान पर जैविक हथियारों से हमले कर रही थी,तब ईरान के पास भी जैविक हथियार थे लेकिन उस वक्त के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने ईरान की फोर्स को इराक के खिलाफ जैविक हथियारों का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। उनका कहना था कि ये हथियार मानवता के दुश्मन हैं और इनसे एक बड़े हिस्से में आम नागरिक मारे जाएंगे। मानवता का नुकसान करने की इजाजत धर्म नहीं देता। तब ईरान के पास न मिसाइल थी, न एडवांस हथियार। ईरान-इराक जंग आठ साल तक चली थी।
सोचिए एक दौर में जंग के दौरान हथियारों की कमी से जूझ रहे ईरान की मिसाइल ताकत को अब दुनिया ने अच्छी तरह से देख लिया है। आज की डेट में मिसाइल तकनीक में ईरान का हाथ कोई नहीं पकड़ सकता,ये साफ हो चुका है।
जब १९७९ में ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन के एक साल बाद ही पड़ोसी देश इराक ने हमला कर दिया, उस वक्त अमेरिका रूस और मिडिल ईस्ट के सभी देश इराक के पीछे खड़े थे। पूरी दुनिया सद्दाम हुसैन के साथ और ईरान करीब करीब अकेला था। जानकार बताते हैं कि उस वक्त ईरान के पास एक भी मिसाइल नहीं थी। कहा जाता है उस समय आईआरजीसी के अधिकारियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई से कहा था कि हमने सबसे गुहार लगा ली। कोई भी देश हमें मिसाइल देने के लिए तैयार नहीं है। अगर एक भी मिसाइल हमें कहीं से मिल जाती तो हम अपने दुश्मन इराक पर दाग देते, जिससे दुश्मन थोड़ा खौफ में आ जाता। आठ साल तक चली ईरान-इराक जंग जब खत्म हुई तो उसके बाद से ईरान ने तमाम सैंक्शंस के बावजूद अपने मिसाइल प्रोग्राम पर इस शिद्दत से काम किया कि आज वो मिसाइल रखने वाले टॉप मुल्कों की कतार में आता है। मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि एक तो ईरान का मिसाइल प्रोग्राम बेहद एडवांस है उस पर से उसने बड़ी-बड़ी मिसाइल सिटी बना रखी हैं। जमीन के काफी नीचे दुश्मनों की पहुंच से दूर। इतना ही नहीं ईरान दुनिया के उन कुछ चुनिंदा देशों में से एक है जिसने हाइपर सोनिक और सुपर सोनिक मिसाइलों की वो तकनीक विकसित कर ली है जिसमें मिसाइल पहले स्पेस में जाती है लेकिन स्पेस से पूरी ताकत और स्पीड से वापस आकर अपने टार्गेट पर एक दम सटीक हिट करती है।
यही वजह है कि ईरान पर एक बार फिर हमले की सजिश रची जा रही है। इस बार.ईरान पर इतना भारी और कई स्तरों पर एक साथ ऐसा हमला होगा कि वो रिटेलिएट करने लायक ही नहीं बचेगा। दूसरी तरफ ईरान भी फिर से जंग लड़ने के मूड में है। सीजफायर टूटने पर ईरान भी मिडिल ईस्ट में कोहराम मचाएगा। ईरान की तरफ से बयान भी आने लगे हैं। ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ जो एक जिम्मेदार ओहदे पर हैं, उनके मुताबिक अब हमला होता है तो ईरान गल्फ को बर्बाद कर देगा। अगर ईरान और अमेरिका के बीच सुलह की आखिरी कोशिश कामयाब नहीं हुई, जिसकी आशंका ज्यादा है तो ये मानकर चलिए जंग बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचेगी।

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