हाल में अमेरिका की एक बड़ी वित्तीय कंपनी से जुड़े मुकदमे ने ‘सेक्स स्लेव’ जैसी भयावह परिकल्पना को फिर चर्चा में ला दिया है। एक पूर्व कर्मचारी ने अपनी वरिष्ठ अधिकारी पर आरोप लगाया कि नौकरी, बोनस और करियर की धमकियों के दबाव में उसका यौन शोषण किया गया, नस्ली टिप्पणियां की गईं और उसे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश हुई। शिकायतकर्ता ने यहां तक दावा किया कि उसे नशीला पदार्थ देकर शोषण किया गया और उसके साथ ‘सेक्स स्लेव’ जैसा व्यवहार हुआ। हालांकि, संबंधित अधिकारी और कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है। कंपनी का कहना है कि आंतरिक जांच में आरोपों के समर्थन में प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे से पहले समझौते की पेशकश भी हुई थी, जिसे शिकायतकर्ता ने ठुकरा दिया। यहां असली प्रश्न यह है कि ‘सेक्स स्लेव’ का अर्थ क्या है? इसका मतलब केवल यौन संबंध नहीं है। इसका अर्थ है, किसी व्यक्ति की इच्छा, सहमति, स्वतंत्रता और गरिमा पर कब्जा। जब पद, पैसा, नौकरी, वीजा, करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा या बदनामी का डर दिखाकर किसी को यौन व्यवहार के लिए मजबूर किया जाए, तो यह शोषण की चरम स्थिति बन जाती है। पश्चिमी समाज खुद को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और खुलेपन का प्रतीक बताता है, लेकिन इसी खुलेपन की आड़ में कई बार सत्ता-संबंधों का दुरुपयोग भी छिप जाता है। कॉर्पोरेट दफ्तर, फिल्म उद्योग, राजनीति, पैâशन, टेक कंपनियां और उच्च समाज, हर जगह ऐसे आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। सहमति और शोषण के बीच की रेखा बहुत महीन होती है; पर जहां डर, दबाव, नशा, ब्लैकमेल या पद का दुरुपयोग आ जाए, वहां सहमति समाप्त हो जाती है। हालिया मामला अदालत में है और सच न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी। लेकिन यह विवाद बताता है कि आधुनिकता की चमक के पीछे भी देह, डर और करियर को नियंत्रण का औजार बनाने वाली मानसिकता जिंदा है।
