सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
“संपूर्ण विश्व पर मंडरा रहे तीसरे विश्वयुद्ध के संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्राणघातक प्रतिस्पर्धा के कारण समाज में छाई निराशा; ऐसी अत्यंत भीषण और अस्थिर परिस्थिति से समाज को उबारने के लिए अब केवल भौतिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। आज दिशाहीन हुए समाज को एक बार फिर प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर आधारित ‘रामराज्य’ की नितांत आवश्यकता है। परंतु यह रामराज्य केवल राजनीतिक या भौतिक प्रयासों से साकार नहीं होगा, बल्कि इसके लिए समाज को ‘साधना’ और ‘गुरुचरणों’ के सुदृढ़ आध्यात्मिक अधिष्ठान की आवश्यकता है। जब समाज की आध्यात्मिक श्रद्धा प्रत्यक्ष सुशासन में परिवर्तित होती है, तभी सच्चे अर्थों में रामराज्य का उदय होता है।”
ये विचार सनातन संस्था की ओर से आयोजित ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ में रीता पाठक ने व्यक्त किए। इस वर्ष संस्था की ओर से मराठी, हिंदी, गुजराती, कन्नड़, अंग्रेजी, तेलुगु, मलयालम आदि विभिन्न भाषाओं में देशभर में 81 स्थानों पर तथा बिहार के समस्तीपुर एवं हाजीपुर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर सहित अन्य स्थानों पर यह महोत्सव आयोजित किया गया।
आगामी विश्वयुद्ध और आपातकाल की आशंका को देखते हुए हिंदुओं से प्राथमिक उपचार, अग्निशमन और आत्मरक्षा प्रशिक्षण लेने का आह्वान किया गया। महोत्सव के आरंभ में श्री व्यास पूजन और भक्तराज महाराज जी का प्रतिमा पूजन (गुरु पूजन), सनातन संस्था एवं संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले जी के कार्यों पर आधारित लघुचित्रपट (डॉक्यूमेंट्री), सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले जी के संदेश का वाचन, धर्मरक्षकों और हिंदुनिष्ठों का सत्कार, आत्मरक्षा की आसान पद्धतियों का प्रदर्शन, रामराज्य की स्थापना का संकल्प और भावपूर्ण नामजप किया गया।
वहीं, महर्षि विद्या मंदिर में भी गुरु पूर्णिमा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जटाशंकर यादव, सह जिला विद्यालय निरीक्षक उपस्थित रहे। प्रधानाचार्य जेएन उपाध्याय ने बुके भेंट कर उनका स्वागत किया। ध्यान एवं सिद्धि प्रशासक शैलेंद्र पांडेय के नेतृत्व में सभी ने परंपरागत गुरु पूजन किया। इसके बाद प्राणायाम एवं भावातीत ध्यान का सामूहिक अभ्यास कराया गया।
इसके पश्चात प्रधानाचार्य के साथ मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया। स्वागत गीत से अतिथियों सहित सभी उपस्थित लोग भाव-विभोर हो उठे। प्रधानाचार्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भावातीत ध्यान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव अपने जीवन में प्रतिदिन इसका अभ्यास कर अपनी चेतना में सकारात्मकता का विकास कर सकता है, जिससे वह अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकता है।
प्रधानाचार्य जेएन उपाध्याय ने महर्षि आध्यात्मिक जन जागरण एवं महर्षि विश्व शांति अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग, भावातीत ध्यान एवं सिद्धि के अभ्यास से जीवन में सकारात्मकता का विकास होगा। इससे समाज में समरसता एवं अजेयता आएगी तथा विश्व शांति की स्थापना में सहयोग मिलेगा।
प्रधानाचार्य ने बताया कि महर्षि संस्थान के अध्यक्ष वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश जी, जो महर्षि जी के परम प्रिय शिष्य हैं, के नेतृत्व एवं निर्देशन में भावातीत ध्यान के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में विद्यालय की छात्राओं ने समूह गान, एकांकी, भाषण आदि प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि ने बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि छात्र जीवन में अनुशासन एवं गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान ही प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने मन के विषय में कहा कि मन को चंचल होने से बचाना चाहिए, क्योंकि मन की चंचलता लक्ष्य प्राप्ति में बाधक होती है। महर्षि के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि मन की चंचलता को शांत करने का सबसे बड़ा साधन भावातीत ध्यान है।
उन्होंने कहा कि गुरु की महत्ता अद्वितीय होती है। बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं है और ज्ञान के अभाव में चारों ओर अंधकार ही होता है। इस अवसर पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में भी नन्हे-मुन्ने बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न रूपों में सजे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे।
