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‘ट्रंप कार्ड’ पर भारी पड़ा ‘कैनेडी का क्रेज’!..डोनाल्ड को आदेश, अपना नाम हटाओ

एम एम एस

कुछ भी कहो अमेरिका को इस बात के लिए दाद देनी ही पड़ेगी कि वहां पर प्रेसिडेंट को भी औकात दिखाने की हैसियत कोर्ट रखता है! हमारे ट्रंप साहब ने सोचा था कि व्हाइट हाउस में दोबारा एंट्री मिलते ही वो हर जगह अपना ‘सिग्नेचर स्टाइल’ सेट कर देंगे। इसी स्वैग में उन्होंने जॉन एफ. वैâनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के खुद चेयरमैन बनकर, लगे हाथ दिसंबर में उसका नाम बदलकर ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप और जॉन एफ. कैनेडी मेमोरियल सेंटर’ कर डाला। मतलब, इतिहास के पन्नों में जबरदस्ती अपनी ‘को-पैसेंजर’ वाली सीट बुक करा ली! लेकिन अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज क्रिस्टोफर कूपर ने ट्रंप साहब के इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ पर ऐसा ‘लीगल बाउंसर’ मारा है कि सारा ‘नेम-फेम’ धरा का धरा रह गया।
जज साहब ने साफ-साफ शब्दों में कह दिया, ‘बॉस, ये वन-मैन शो नहीं चलेगा।’ कोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस ने कानूनन तय किया था कि यह सेंटर सिर्फ और सिर्फ ३५वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी का ‘एकमात्र नेशनल मेमोरियल’ रहेगा। अब बोर्ड अपने मन से तो इतिहास रीराइट नहीं कर सकता न! कानून बदलने का कॉपीराइट सिर्फ कांग्रेस के पास है, बोर्ड के ‘वन-साइडेड’ पैâसलों के पास नहीं। नतीजतन, कोर्ट ने ट्रंप साहब का नाम वहां से हटाने के लिए पूरे दो हफ्ते की डेडलाइन थमा दी है। इतना ही नहीं, ट्रंप जी ने जो जुलाई से सेंटर को दो साल के लिए ‘ताला’ लगाने (मेंटेनेंस के बहाने मनोरंजन बंद करने) का ‘ग्रैंड प्लान’ बनाया था, उस पर भी कोर्ट ने ‘टेंपरेरी ब्रेक’ लगा दिया है।

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