-चार दिन की मोहलत से और गहराया सस्पेंस…मानहानि केस में पुलिस जांच पर राज्य की निगाहें
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। तत्कालीन कृषि व मौजूदा खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे के रमी वीडियो विवाद ने फिर गर्मी पकड़ ली है। अदालत के आदेश के बावजूद वीडियो मामले की जांच अधूरी रह गई है और अब पुलिस ने चार दिन की अतिरिक्त मोहलत मांगी है। इस देरी से पूरे मामले में सस्पेंस और भी गहराता जा रहा है, वहीं कोकाटे द्वारा विधायक रोहित पवार के खिलाफ दायर मानहानि केस अब राज्य की सियासत का नया हॉटस्पॉट बन गया है। सत्ता और विपक्ष के साथ ही राज्य की निगाहें इस जांच की दिशा और अदालत में पेश होनेवाली रिपोर्ट पर टिक गई हैं।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान तत्कालीन कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे सदन के भीतर रमी खेलते नजर आ रहे थे। यह वीडियो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने सार्वजनिक किया था। वीडियो सामने आने के बाद कोकाटे पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला, जिसके चलते उन्हें अपने कृषि मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कोकाटे ने रोहित पवार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। सवाल यह उठा कि रोहित पवार को यह वीडियो वैâसे और कहां से मिला? हालांकि, यह बात अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। मामला नासिक की अदालत तक पहुंचा, जहां पुलिस को कोर्ट ने जांच के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति दी थी। अदालत ने पुलिस को ३० अक्टूबर तक विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। पुलिस ने जांच शुरू भी कर दी, जिसमें पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा २०२ के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाना था कि विधान भवन में कोकाटे का वीडियो आखिर किसने रिकॉर्ड किया था।
इस तरह रहा घटनाक्रम
रोहित पवार द्वारा वीडियो वायरल किए जाने के बाद कोकाटे को न केवल कृषि मंत्रालय से हाथ धोना पड़ा, बल्कि किसानों और विपक्ष की कड़ी आलोचना का भी सामना करना पड़ा। विपक्षी दलों ने कोकाटे के इस्तीफे की जोरदार मांग की थी। दबाव बढ़ता देख उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने मंत्रालयों का पुनर्वितरण किया, जिसमें कोकाटे से कृषि विभाग लेकर उन्हें खेल मंत्री बनाया गया, जबकि दत्ता भरणे को कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग से कोकाटे का हटना उनके लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ।
