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मोनोरेल यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे!..भीड़ नियंत्रण के लिए स्टेशनों और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा रक्षक नाकाफी

सामना संवाददाता / मुंबई

अधिक यात्रियों की भीड़ से मोनोरेल का एक रेक झुकने की घटना सामने आने के बाद भी मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मोनोरेल की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया है। भीड़ नियंत्रण के लिए स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त सुरक्षा रक्षक अब तक नियुक्त नहीं किए गए हैं। कम फेरे और यात्रियों की सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों की सुरक्षा खतरे में है।
१९ अगस्त को मैसूर कॉलोनी स्टेशन के पास अधिक यात्रियों की वजह से मोनोरेल का एक रेक झुक गया था। इसमें ५०० से ज्यादा यात्री फंस गए थे। उस घटना के बाद एमएमआरडीए से मोनोरेल सेवा को सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने की उम्मीद थी। लेकिन घटना को दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी एमएमआरडीए प्रशासन सुरक्षा के मामले में लापरवाह ही बना हुआ है। अधिकांश स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति नहीं की गई है।
पिछले दस दिनों में बड़ी संख्या में गणेशभक्तों ने चेंबूर से दक्षिण मुंबई तक मोनोरेल से यात्रा की। संभावित भीड़ को देखते हुए भी एमएमआरडीए ने सुरक्षा पर गंभीरता नहीं दिखाई। इस पर नियमित यात्रियों ने नाराजगी जताई। ‘मैसूर कॉलोनी की घटना के बावजूद प्रशासन सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इस कारण हमें हमेशा यात्रा के दौरान डर लगा रहता है,’ ऐसा एक यात्री ने कहा।
टिकट खिड़कियों के पास अंधेरा
दक्षिण मुंबई का मोनोरेल का लोअर परेल स्टेशन सबसे भीड़ वाले स्टेशनों में से एक है। यहां से पश्चिम और मध्य रेलवे तक जाने वाले यात्रियों की आवाजाही रहती है। लोअर परेल सहित कई स्टेशनों पर टिकट खिड़कियों के आस-पास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए अंधेरे से होकर गुजरना पड़ता है। इससे महिला यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।
ग्राहक सेवा केंद्र में कर्मचारी ही नहीं
एमएमआरडीए ने यात्रियों की सुविधा के लिए मोनोरेल स्टेशनों पर ग्राहक सेवा केंद्र शुरू किए हैं। लेकिन लोअर परेल स्टेशन पर देखा गया कि इन केंद्रों पर कर्मचारी ही मौजूद नहीं रहते। इंडिकेटर्स पर भी ट्रेनों की अग्रिम सूचना नहीं दी जाती। इसके कारण यात्रियों को असमंजस की स्थिति में रहना पड़ता है। खास बात यह है कि प्लेटफॉर्म के किनारे लगी जालियों के कुछ हिस्से खुले रहते हैं। वहां सुरक्षा रक्षक तैनात न होने से बच्चों के ट्रैक के पास जाने का खतरा बढ़ जाता है।

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