-जब देश को भुखमरी से बचाने के लिए आईएमएफ के सामने कटोरा फैलाया जा रहा था, ठीक उसी वक्त अंदरखाने अगले वित्त वर्ष के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर २.६६ लाख करोड़ रुपए करने की फाइल तैयार हो रही थी।
एक पुरानी कहावत है, `तन पर नहीं लत्ता पान खाय अलबत्ता।’ इसका सीधा सा मतलब है कि जेब में फूटी कौड़ी न होना, लेकिन शौक नवाबों वाले रखना। आज के दौर में यह कहावत किसी देश पर सौ प्रतिशत सटीक बैठती है, तो वह है हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान। वहां की हालत ऐसी है कि अवाम आटे की बोरी के लिए ट्रकों के पीछे दौड़ रही है, बिजली के बिल देखकर लोगों को दिल के दौरे पड़ रहे हैं और देश का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है। लेकिन मजाल है कि शहंशाहों के तेवर में कोई कमी आ जाए!
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ताजा रिपोर्ट ने इस कंगाली के बीच एक और दिलचस्प तमाशा दुनिया को दिखाया है। जब देश को भुखमरी से बचाने के लिए आईएमएफ के सामने कटोरा पैâलाया जा रहा था, ठीक उसी वक्त अंदरखाने अगले वित्त वर्ष के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर २.६६ लाख करोड़ रुपए करने की फाइल तैयार हो रही थी। मतलब, घर में दीया जलाने के लिए तेल नहीं है, लेकिन सरहद पर बारूद का नया शौक पालना बेहद जरूरी है। पाकिस्तानी हुक्मरानों का यह `पान खाने’ का शौक नया नहीं है। देश चाहे दिवालिया होने के कगार पर हो, सेना का बिजनेस एम्पायर फल-फूल रहा है। वहां की फौज बंदूकें चलाने से ज्यादा कॉर्नफ्लैक्स, सीमेंट और रियल एस्टेट बेचने में व्यस्त है। जनता से कहा जा रहा है कि वे चाय पीना कम कर दें ताकि विदेशी मुद्रा बचे, लेकिन सेना के सीक्रेट फंड्स और परमाणु कार्यक्रमों के वीआईपी खर्चों पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। दुनिया हैरान है कि जो मुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य पर अपनी जीडीपी का दो प्रतिशत भी ठीक से खर्च नहीं कर पाता, वह हर बार आईएमएफ की कड़वी शर्तों के बीच भी फौज की थाली में मलाई परोसने का रास्ता ढूंढ़ ही लेता है। खैर, भूखे पेट बैठकर बंदूक साफ करने और आतंकवादियों को पालने की इस जिद का अंजाम पूरी दुनिया देख रही है। पाकिस्तान के लिए तो बस यही कहा जा सकता है कि जनाब, पान का शौक अपनी जगह ठीक है, लेकिन कम से कम घर में `लत्ता’ (कपड़ा) और रसोई में आटा तो रख लीजिए!
