सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र में काम के घंटों में बदलाव करते हुए दैनिक कार्य के घंटों को नौ से बढ़ाकर बारह करने का पैâसला किया है। इसको लेकर पुणे में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के कर्मचारियों ने सरकार के इस पैâसले पर सवाल उठाए हैं। सरकार के इस पैâसले का पुणे के लाखों आईटी कर्मचारियों के कामकाज के तरीकों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस मुद्दे को लेकर अगले कुछ दिनों में आंदोलन के संकेत मिलने लगे हैं। यानी सड़क पर उतरने की तैयारी दिखाई देने लगी है।
बता दें कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में उक्त निर्णय लिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को प्रतिदिन ९ घंटे की बजाय १० घंटे काम करना होगा। साथ ही ९ घंटे से अधिक काम करने वाले कर्मचारियों को उनके मूल वेतन के दोगुने दर से ओवरटाइम देना अनिवार्य होगा, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों की सहमति जरूरी है। यह पैâसला २० या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों पर लागू होगा और पैâक्ट्रियों में काम के घंटे बढ़ाकर १२ घंटे करने की भी मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए भी दोगुनी दर पर ओवरटाइम का प्रावधान है। इसके लिए महाराष्ट्र दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम २०१७ और फैक्टरी अधिनियम १९४८ में संशोधन किए जाएंगे।
काम के घंटे को लेकर उठाए सवाल
निजी क्षेत्र के कर्मचारी संगठनों द्वारा इस फैसले का कड़ा विरोध किया जा रहा है। पुणे में बड़ी संख्या में कार्यरत आईटी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन फोरम ऑफ आईटी एम्प्लॉइज ने सरकार से सीधे सवाल पूछे हैं। फोरम ने एक्स पर किए एक पोस्ट में कहा कि सरकार ने आईटी या निजी क्षेत्र में काम के घंटे ९ से बढ़ाकर १२ घंटे कर दिए हैं, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों का क्या? कर्मचारियों की अनुचित छंटनी, जबरन इस्तीफे और एकमुश्त भुगतान जैसे सभी जरूरी मुद्दों पर सरकार चुप क्यों है? ऐसा सवाल फोरम ने किया है।
