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अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : बाजार में सोने का उतार-चढ़ाव, डी कंपनी के लिए बना वरदान

सोने की तस्करी से डी कंपनी ने खड़ी की १ लाख करोड़ रुपए की काली कमाई

जय सिंह
देश में आम आदमी सोने की कीमत देखकर माथा पकड़ रहा है। हालात यह है कि सोने की कीमत आसमान पर चढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण भी बढ़ती तस्करी ही है।
लेकिन उधर अपने पाकिस्तानी मित्र की गोद में बैठा अंडरवर्ल्ड का मोस्ट वॉन्टेड दाऊद इब्राहिम उसी सोने की नदिया में रोजाना करोड़ों की डुबकियां लगा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों का उतार-चढ़ाव डी कंपनी के लिए किसी बरसाती मेघा की तरह बरसा और पिछले तीन दशक में इस गिरोह ने १ लाख करोड़ रुपए की काली कमाई का पहाड़ खड़ा कर लिया।   हिंदुस्थान ही नहीं गल्फ से सोने की तस्करी दुबई, ओमान और कराची के रास्ते चल रहा सोने का अवैध कारोबार हमेशा डी कंपनी की मुट्ठी में रहा है।
सोने का भाव बढ़ने की भनक मिलते ही दाऊद के लोग स्टोर किया हुआ माल बाजार में उतार देते हैं और मोटी कमाई करते हैं। सूत्रों की मानें तो इस काली कमाई को हवाला नेटवर्क से घुमा-फिराकर मुंबई, दुबई और पाकिस्तान में ठिकानों तक पहुंचाया जाता रहा है जांच एजेंसियों की फाइलें साफ कहती हैं कि कई पोर्ट और कस्टम नेटवर्क डी कंपनी के ‘गैर-सरकारी कर्मचारी’ बन चुके है। एक जानकारी के मुताबिक, हर साल ८,००० से १०,००० किलो सोने की तस्करी इस गिरोह द्वारा की जाती है। तस्करी किए गए सोने से प्रति किलो रुपए ६ से १५ लाख का काला फायदा होता है और यही कारण है कि तीन दशक में इस कारोबार से कमाई तकरीबन १ लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। सोने की कीमतें जैसे ही आसमान छूती है। डी कंपनी की तिजोरी में करोड़ों की कमाई आने लगती है। आम जनता के लिए जहां यह महंगाई होती है। डी कंपनी के लिए वरदान होती है।
ईडी, एनआईए, डीआरआई और मुंबई पुलिस ने कई गिरोह पकड़े, लेकिन हर बार कहानी एक ही डोर की दूसरी तरफ था। दाऊद का नेटवर्क सोने की तस्करी आज भी डी कंपनी की सबसे मोटी आर्थिक नस मानी जाती है।
सूत्रों की मानें तो कराची के उस अंधेरे ठिकाने से आज भी दाऊद की तिजोरी में सोने की खनक गूंज रही है और भारत की एजेंसियां उसे रोकने की जद्दोजहद में जुटी हैं।
दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी ने पिछले तीन दशक में अंतर्राष्ट्रीय सोने के बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदेमंद इस्तेमाल कर लगभग १ लाख करोड़ रुपए की गुप्त कमाई जुटाई है, लेकिन यह कारोबार सिर्फ दाऊद अकेले नहीं चलाता था उसके गिरोह में ऐसे छुपे रुस्तम खिलाड़ी भी हैं, जो सोने की तस्करी को चुपके से मैनेज करते हैं। जानकारी के मुताबिक, फिरोज ‘ओआसिस’ नामक एक दक्षिण भारतीय सहयोगी, डी कंपनी के सोने और हीरा नेटवर्क के प्रमुख चेहरे में से एक है। एनआईए की सुनवाई में यह सामने आया है कि तंजानिया और दुबई में डी कंपनी की सोने की गतिविधियों में फिरोज ‘ओआसिस’ की गहरी भागीदारी है।
वहीं एक और अहम बंदा था। इकबाल, जो दाऊद गिरोह में ‘स्वीकृत कारोबारी’ चेहरा है, वही इकबाल ज्वेलरी और सोने से जुड़े व्यापार को देखता था।
इसके अलावा, दाऊद का अपना भाई अनीस इब्राहिम भी तस्करी ड्रग्स और अन्य गैरकानूनी कमाई के कारोबार में शामिल है। आइए जानते है वैâसे चलता है सोने की तस्करी का यह कारोबार! तस्करी के लिए फिरोज ‘ओआसिस’ की तस्करी यूनिट विदेशों में सक्रिय तंजानिया और दुबई जैसे हब्स पर कंट्रोल करती है!
आज इकबाल भले ही इस दुनिया मे नहीं है, लेकिन इकबाल की गुप्त नेटवर्विंâग उसे ‘सोने और ज्वेलरी का हिसाब-किताब’ करने में महारत हासिल थीं, जिससे डी कंपनी का अवैध सोना व्यापार अबाधित चलता था। दाउद के सगे भाई अनीस का रोल भी सिर्फ सपोर्टिंग नहीं है, वह लॉजिस्टिक्स, वित्त और तस्करी को दाऊद के परम नजदीकी साथी के रूप में मैनेज करता है। दाऊद के लिए सोने का यह कारोबार सिर्फ बचत का सहारा नहीं, यह डी कंपनी का एक महत्वपूर्ण आर्थिक कारोबार बन चुका है।
इकबाल की पुरानी परछाईं
इकबाल मिर्ची की मौत के बाद भी उसका ‘कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क’ आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही शेल कंपनियां आज भी गोल्ड की तस्करी में इस्तेमाल हो रही हैं।

कल पढ़े फिरोज ओआसिस और इकबाल के दम पर सोने की तस्करी कर दाऊद ने खड़ी की १ लाख करोड़ की काली सल्तनत।

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