सुरेश गोलानी / भायंदर
पुणे के हडपसर स्थित पंढेवारवाड़ी और पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी-दापोड़ी इलाके में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने फिर एक बार राज्य के कई हिस्सों में चल रही अवैध हाथभट्ठियों और प्रशसन की अनदेखी की तरफ ध्यान आकर्षित कर दिया है। ‘दोपहर का सामना’ ने १३ मई २०२६ को अपने अंक में महायुति सरकार को सचेत करते हुए कच्ची शराब माफिया के सक्रिय होने के संबंध में विस्तारपूर्वक खबर को प्रकाशित किया था। भायंदर-पश्चिम के उत्तन जैसे तटीय इलाकों और भायंदर के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में चलाई जा रही हाथभट्ठियों में कच्ची शराब का निर्माण और वितरण धड़ल्ले से जारी है।
जानकारी के अनुसार, अड्डा चलानेवाले कई कुख्यात विक्रेता गोराई और मनोरी से भी कच्ची शराब की तस्करी में शामिल हैं। मेथनॉल और रेक्टिफाइड स्पिरिट जैसे जहरीले रसायनों का इस्तेमाल करके अवैज्ञानिक तरीके से बनाई गई अवैध शराब के सेवन से मौत और आंखों की रोशनी जाने सहित कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। आमतौर पर सड़ा हुआ गुड़, यूरिया, नौशादर और अन्य खतरनाक रसायनों को मिलाकर किण्वन (फर्मेंटेशन) किया जाता है और भट्ठी में निर्धारित तापमान पर उबाला जाता है। उल्लेखनीय है कि घने जंगलों के बीच कच्ची शराब बनानेवालों ने धुएं को कम करने और कार्रवाई से बचने के लिए लकड़ी जलाकर हाथभट्ठी चलाने के बजाय अब गैस से चलनेवाली सिगड़ियों का उपयोग कर रहे हैं।
कच्ची शराब के लिए ठोस एक्शन प्लान नहीं
महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल शराब पर टैक्स तो बढ़ा दिया, लेकिन कच्ची शराब बनानेवालों को रोकने का कोई ठोस एक्शन प्लान नहीं बनाया। देसी शराब पर टैक्स को १८० रुपयों से बढ़ाकर २०५ रुपए प्रति बल्क लीटर कर दिया गया है। नतीजतन सामान्य पीने वाले को अपनी पसंदीदा देसी शराब के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे थे। इस मौके का सीधा फायदा कच्ची शराब बनानेवाले माफियाओं ने उठाया, जो जंगलों और मैंग्रोव्ज क्षेत्रों में बेखौफ होकर हाथभट्ठियां चलाने लगे।
