मुख्यपृष्ठस्तंभशादियों में फिजूल खर्च क्यों?

शादियों में फिजूल खर्च क्यों?

डॉ. धीरज फूलमती सिंह 
मुंबई

भारत में शादियां बड़ी भव्य होती है। अमूमन एक शादी में लड़का और लड़की दोनों की तरफ सें औसतन ३०० लोग शादी में शामिल होते ही हैं। अभी हाल ही में बेंगलुरू की एक संस्था ‘वेडिंग वाईव्स’ द्वारा १३५ विवाह समारोह को लेकर एक सर्वे करवया गया था, जिसके नतीजे बहुत चौंकाने वाले हैं।
– शादी में आये मेहमानों में से ७०ज्ञ् लोगों को अगले दिन कुछ याद ही नहीं रहता है। आप की शादी का डेकोरेशन, तरह-तरह के व्यंजन जैसी मूल बातें तक वे भूल जाते है यानि वे वो सब कुछ भूल जाते है, जिनको आकर्षित करने के लिए आप ने दिन रात एक कर दिया था।
– जिन शादियों में ३०० लोग तक आते हैं, उनका औसत निकालने पर यह बात सामने आई है कि ऐसी शादियों का औसत खर्च लगभग २८ लाख रुपए तक आता है और मजे की बात है कि ऐसी भारतीय शादियां में ६०ज्ञ् लोग सिर्फ खाना खाने आते है यानी ३०० में से लगभग १८० लोगों को सिर्फ खाने से मतलब होता है। आप इन ‘खाने से मतलब रखने’ वालों में मुझे भी शामिल कर सकते है।
– भारतीय शादियों में ७०ज्ञ् लोग सिर्फ अपने कपड़े और गहने दिखाने आते है यानि ७०ज्ञ् लोगों का मकसद सिर्फ पैâशन स्टेटमेंट और स्टेटस से होता है, जिसमें ९८ज्ञ् महिलाएं सिर्फ दिखावा करने आती हैं। शादी में आये इन ७०ज्ञ् लोगों को दूल्हा-दुल्हन और उसके परिवार से कोई मतलब नहीं होता है। बस वे अपना स्टेटस दिखाने आते हैं।
– विवाह समारोह में ५५ज्ञ् लोग सिर्फ इस लिए आते हैं कि हम नहीं जाएंगे तो हमारे में कौन आएगा, वैसे इन ५५ज्ञ् लोगों में मैं शामिल नही हूं। ये ५५ज्ञ् लोग शादी में सिर्फ औपचारिकता निभाने आते हैं।
अभी हाल ही में एक युगल ने बहुत ही लाजवाब मिसाल कायम की है। अपनी शादी पर खर्च होने वाले संभावित रुपयों से लगभग ४५ लाख रुपए में उन्होंने अपने लिए अपने शहर में एक बंगला खरीदा। अपने लिए घर बनाया और गृह प्रवेश के दिन ही अपनी शादी का मुहूर्त भी तय कर लिया, फिर उसे कोर्ट में रजिस्टर्ड भी कर लिया यानी सांस्कृतिक, धार्मिक और कानूनी रूप से अपनी शादी को वैध बना दिया!
क्या उन पैसों को फिजूल खर्च कर बर्बाद करने के बजाय हम उनसे अपने बच्चों का भविष्य उज्जवल नहीं बना सकते हैं? आखिर यह दिखावा किसके लिए अंत में हमें क्या मिलता है? सिर्फ कर्ज के बोझ तले झुकी हुई गर्दन, जिसका बोझ कुछ समय बाद कंधे तक नहीं उठा पाते हैं।

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