दुनियाभर में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, इस समय दुनिया का हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहा है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे ज्यादा असर युवाओं पर दिखाई दे रहा है, वहीं पुरुषों में आत्महत्या के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं, जबकि महिलाओं में एंजायटी और डिप्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य आज भी दुनिया के सबसे ज्यादा नजरअंदाज किए जाने वाले हेल्थ संकटों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका क्षेत्र में मेंटल डिसऑर्डर की दर सबसे ज्यादा १५.६ प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि यूरोप में यह १४.२ प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में १३.२ प्रतिशत रही. कोविड-१९ महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में अचानक तेजी देखी गई।
सुसाइड के बढ़ रहे हैं मामले
मेंटल हेल्थ संकट का सबसे खतरनाक पहलू आत्महत्या के बढ़ते मामले हैं। मेडिकल जर्नल द लैंसेट में पब्लिश एनालिसिस के अनुसार हर साल करीब ७.४ लाख लोग आत्महत्या करते हैं। इसका मतलब है कि दुनिया में हर ४३ सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान दे रहा है। १५ से २९ साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।
