५७ टन कचरे का रिकॉर्ड सिर्फ आखिरी दिन
४६६ कर्मचारियों के दम पर साफ हुआ मैदान
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई का आजाद मैदान पांच दिनों तक आंदोलन का नहीं, बल्कि कचरे का अड्डा बना रहा। प्लास्टिक की बोतलें, पत्तलें और बचे हुए खाने से जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे। नतीजतन पूरे आंदोलन के दौरान १२५ टन कचरा जमा हुआ, जिसमें सिर्फ आखिरी दिन का आंकड़ा ही रिकॉर्ड ५७ टन रहा। हालात संभालने के लिए मनपा को ४६६ कर्मचारियों की फौज उतारनी पड़ी। इसी के साथ ही स्वच्छता के लिए ३५० मोबाइल शौचालय, ६१ स्थाई सीटें और २६ पानी के टैंकर मुहैया कराए गए। वहीं मैदान को साफ करने के लिए १,५०० लिफ्टर, ४०० झा़ड़ू, १,००० दस्ताने और भारी मशीनरी झोंकनी पड़ी।
उल्लेखनीय है कि २९ अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन लगातार मंगलवार यानी पांच दिनों तक चला। आजाद मैदान, सीएसएमटी और मनपा मुख्यालय के आसपास के इलाकों में हजारों प्रदर्शनकारियों ने डेरा डाला था। बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर खाना बनाने, खाने, सोने और नहाते दिखे। इसके चलते जमीन पर खाने के अवशेष, प्लास्टिक बोतलें, पेपर प्लेट और कप का अंबार लग गया। इस दौरान मुंबई का आजाद मैदान और आसपास का इलाका कचरे के ढेर में तब्दील हो गया। मनपा प्रशासन के मुताबिक, आंदोलन के पांच दिनों में १२५ टन से ज्यादा कचरा इकट्ठा किया गया। अकेले दो सितंबर को ही ५७ टन कचरा इकट्ठा हुआ, जबकि पहले दिन यह आंकड़ा सिर्फ चार टन था।
बचा हुआ खाना भी बना चुनौती
समाज के सदस्यों द्वारा दान किया गया कुछ बचा हुआ खाना स्थानीय लोगों में बांट दिया गया। हालांकि, मंगलवार देर रात तक प्रदर्शन स्थल पर काफी मात्रा में खाना पड़ा रहा, जिसे मनपा कर्मचारियों द्वारा साफ कर दिया गया।
इस तरह चला सफाई अभियान
कचरे के ढेर को साफ करने के लिए मनपा को ४३८ मजदूरों और २८ पर्यवेक्षकों समेत ४६६ कर्मचारियों की टीमों को तैनात करना पड़ा। सफाई के लिए तीन बड़े कॉम्पैक्टर, दो छोटे कॉम्पैक्टर, १३ सीवर क्लीनिंग वाहन और चार विशेष जेटिंग मशीनें उतारी गईं।
