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२१ मासूमों पर जुल्म… सेरोगेसी के जाल और ‘हॉरर हाउस’ की खौफनाक सच्चाई

-मनमोहन सिंह

कैलिफोर्निया के आर्केडिया में २१ बच्चों को प्रताड़ित करने वाले ‘हॉरर हाउस’ के खुलासे ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। सेरोगेसी के जरिए बच्चों को जन्म दिलाकर उन्हें कथित ‘लर्निंग सेंटर’ में बंद करने और डंडों व यातनाओं का शिकार बनाने वाले आरोपी दंपति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सभी मासूमों को सुरक्षित निकालकर राज्य संरक्षण में भेज दिया गया है।
३२ कैमरौं के अलग-अलग स्क्रीन पर
छोटे-छोटे मासूम फफक-फफक कर रो रहे थे, चीख रहे थे चिल्ला रहे थे। उनकी चीख-पुकार इस कदर मर्मातंक थी की पत्थर का कलेजा भी पिघल जाए लेकिन उस कमरे में एक दंपति उन बच्चों की पीड़ा को देखकर जोर-जोर से कह-कहे लगा रहे थे। इतना ही नहीं जैसे ही कोई एक बच्चा रोते-रोते चुप हो जाता तो वहां पर उनको पीटने वाली महिलाएं थीं जिन्हें आदेश दिया जाता कि उसे और पीटो ताकि और जोर से रोए…! इन बच्चों में २ महीने के मासूम तक थे! यह एक आलीशान हवेली थी, कैलिफोर्निया के आर्केडिया में।
इसी खौफनाक और अमानवीय माहौल से पर्दा तब उठा, जब मई २०२५ में महज २ महीने के एक दूधमुंहे बच्चे को सिर में गंभीर चोटों के कारण अस्पताल ले जाया गया। बच्चे की हालत देखकर डॉक्टरों और अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद लॉस एंजिल्स काउंटी पुलिस और बाल कल्याण विभाग ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। इस जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। जांच में पता चला कि इस हवेली में २१ बच्चे रह रहे थे, जिनमें से अधिकांश का जन्म देश भर की अलग-अलग सेरोगेट माताओं के जरिए हुआ था। आरोपी दंपति, सिल्विया झांग और गुओजुन जुआन, ने सेरोगेट माताओं से झूठ बोलकर और अपनी असलियत छुपाकर इस पूरे सेरोगेसी नेटवर्क को अंजाम दिया था। वे घर में लगे ३२ कैमरों से बच्चों पर होने वाले अत्याचार को देखते थे और एक बिना कैमरे वाले कमरे में बच्चों को ले जाकर इस कदर प्रताड़ित किया जाता था कि बाहर सिर्फ उनकी दर्दनाक चीखें सुनाई देती थीं। घर के भीतर बने तथाकथित ‘लर्निंग सेंटर’ में नन्हे बच्चों को घंटों डेस्क पर बिठाकर रखा जाता था। वहां सुरक्षा कैमरों की निगरानी में बच्चों को डंडों से पीटा जाता था, उन्हें दर्दनाक ‘हॉर्स स्टेंस’ की मुद्रा में खड़े रहने पर मजबूर किया जाता था और उनकी चीखों की परवाह किए बिना उन्हें शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि जब नैनियां बच्चों पर जुल्म ढाती थीं, तो घर का मालिक उन्हें रोकने के बजाय और तेज मारने के निर्देश देता था और उनके दर्द पर हंसता था। अधिकारियों ने जब इस ‘हॉरर हाउस’ पर छापा मारा, तो दंपति को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों पर बाल उत्पीड़न, साजिश और गवाहों को डराने-धमकाने के संगीन आरोप दर्ज किए गए हैं। अदालत में जब यह मामला पहुंचा, तो न्यायाधीश ने मामले की संवेदनशीलता और भयावहता को देखते हुए दोनों आरोपियों के लिए २०-२० मिलियन डॉलर की जमानत राशि तय की और उन्हें बच्चों से मिलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। फिलहाल, सभी २१ मासूमों को उस खौफनाक माहौल से सुरक्षित निकालकर राज्य के बाल संरक्षण विभाग की कस्टडी में भेज दिया गया है, जहां उनकी देखरेख और इलाज किया जा रहा है।

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