सामना संवाददाता / मुंबई
पुलिस विभाग में लगातार सामने आ रही आत्महत्याओं की घटनाओं ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पिछले तीन महीनों में तीन पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मानसिक तनाव, अत्यधिक काम का दबाव और लगातार ड्यूटी को इसके प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है। ताजा मामला टिटवाला इलाके का है, जहां यलो गेट पुलिस स्टेशन में तैनात हवलदार भाऊराव दगडू धागे (४२) ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। वे टिटवाला के पंचवटी इलाके की गीतांजलि बिल्डिंग में रहते थे। मूल रूप से अहिल्यानगर जिले के अकोले तालुका के कटलापुर गांव के निवासी धागे हाल ही में अपने गांव से लौटे थे। पुलिस के अनुसार, रविवार सुबह उनका शव टिटवाला में एक रेलवे पुल के नीचे लटका हुआ मिला। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर भीड़ जमा हो गई और इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। फिलहाल आत्महत्या के पीछे का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। टिटवाला पुलिस स्टेशन में इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले १५ मार्च २०२६ को कलीना ट्रेनिंग सेंटर स्थित पुलिस क्वार्टर में एक पुलिसकर्मी का शव मिला था। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था, जिसमें उसने अपनी प्रेमिका के परिजनों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। नोट के अनुसार, प्रेमिका के परिवार वाले उस पर रिश्ता खत्म करने का दबाव बना रहे थे और नौकरी से निलंबित कराने या जान से मारने की धमकी दे रहे थे।
इसके अलावा अप्रैल में आजाद मैदान पुलिस स्टेशन में कार्यरत कांस्टेबल किशोर मस्के ने घाटकोपर स्थित पुलिस क्वार्टर में आत्महत्या कर ली थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पुलिस विभाग में तनाव और कार्य परिस्थितियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
