रामदिनेश यादव / मुंबई
मनपा चुनाव में भाजपा की अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है। टिकट वितरण को लेकर पार्टी में मची अफरातफरी ने भाजपा नेतृत्व की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि मुंबई में भाजपा के करीब ७० बागी उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं, जिससे पार्टी की जीत की राह मुश्किल होती जा रही है। बागियों के चलते भाजपा खुद अपनी चाल में फंसती जा रही है। हालात के मद्देनजर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सांसें फूलती नजर आ रही हैं। इन बागियों को मनाने का दौर लगातर दो दिनों से चल रहा है। इन बागियों को भाजपा के लोग साम, दाम, दंड, भेद और पद का लालच देकर पर्चा वापसी करने के फिराक में हैं। आज शाम तक यदि इन बागियों में कुछ तो पर्चा वापस ले सकते हैं, लेकिन जो बचेंगे वे भाजपा की नाक में दम करने वाले हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा में वरिष्ठ नेताओं की एक टीम बनाई है, जो बागी नेताओं की धर पकड़ कर उनके साथ बैठक कर रहे हैं। उन्हें मनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक २२५ से भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की भाभी हर्षिता नार्वेकर के खिलाफ मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष कमलाकर दलवी, पूर्व नगरसेविका सुजाता सानप, वार्ड ७ में भूपेंद्र काशिनाथ कवली और वार्ड क्रमांक १८५ में भाजपा नेता रमाकांत गुप्ता ने पार्टी के अधिकृत ‘आयातित’ उम्मीदवार रविराजा के खिलाफ अपनी ही बेटी का पर्चा भरवाकर नेतृत्व को खुली चुनौती दे दी है। वार्ड क्रमांक ५४ से भाजपा जिला के महामंत्री संदीप जाधव ने न सिर्फ बगावत की, बल्कि महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वार्ड क्रमांक ६० से भाजपा की पूर्व प्रदेश सचिव दिव्या ढोले, चेंबूर से वार्ड क्रमांक १५५ से पूर्व नगरसेवक जयश्री खरात, बाकी अन्य में हर्षा सालवे शशिकला कांबले, सुरेखा गवली और भाजपा पदाधिकारी प्रकाश पाटील की पत्नी मालती पाटील ने निर्दलीय रूप से पर्चा भर दिया है।
भगदड़ जैसे हालात
मुंबई के अलग-अलग वार्डों में लगातार हो रही बगावत ने भाजपा नेतृत्व को बैकफुट पर ला दिया है। बागियों को मनाने में नेताओं के पसीने छूट रहे हैं, लेकिन असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा। टिकट वितरण में ‘अपनों’ और ‘आयातित उम्मीदवारों’ को तरजीह देने की नीति अब भाजपा के लिए गले की फांस बनती नजर आ रही है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो मुंबई में भाजपा की चुनावी नैया डूबना तय माना जा रहा है।
