मुख्यपृष्ठनए समाचारदो आयुक्त लिखते रहे आपत्तियां, फैसले चलते रहे आगे!

दो आयुक्त लिखते रहे आपत्तियां, फैसले चलते रहे आगे!

-चुनाव आयोग की फाइलों ने खोली नई बहस
-दस महीनों में १४ आंतरिक टिप्पणियां; फॉर्म-६,
-सॉफ्टवेयर और कार्य आवंटन की प्रक्रिया पर उठे सवाल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

चुनाव आयोग के भीतर दर्ज १४ टिप्पणियों ने संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है। एक अंग्रेजी अखबार की जांच के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई अवसरों पर ऐसे निर्णयों तथा प्रशासनिक कार्रवाइयों पर सवाल उठाए, जिनकी जानकारी उन्हें कथित तौर पर लागू होने के बाद मिली। इन टिप्पणियों में मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-६, निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म और अधिकारियों के बीच काम के बंटवारे जैसे विषय शामिल हैं।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि औपचारिक निर्णय सर्वसम्मति से हुए। उसके अनुसार, फाइलों पर दर्ज टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं, स्वतंत्र असहमति प्रस्ताव नहीं। मई में दोनों चुनाव आयुक्तों ने वैधानिक नियमों में संशोधन किए बिना फॉर्म-६ बदलने पर सवाल उठाया था। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त घोषणा का प्रावधान सामने आया। आयोग का कहना है कि अतिरिक्त घोषणा मूल वैधानिक फॉर्म में संशोधन नहीं थी। हालांकि, उसने स्वीकार किया कि ऑनलाइन प्रस्तुति से संशोधन होने का आभास पैदा हो सकता था।
सॉफ्टवेयर पर नियंत्रण किसका?
चुनाव आयोग का तर्क है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का वैधानिक अधिकार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास ही है। लेकिन आंतरिक टिप्पणियों में सवाल था कि क्या डिजिटल प्रणाली अधिकारियों को अपने सभी वैधानिक अधिकार स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करने देती है। आयोग ने विशेषज्ञों की सहायता से तकनीकी अनुपालन की समीक्षा की व्यवस्था बताई है।

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