-अभी ४८ डेथ स्पॉट मौजूद
-मनपा खर्च करेगी २२ करोड़ रुपए
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई की सड़कों पर १,११८ लोगों की मौत के बाद आखिरकार मनपा प्रशासन की नींद खुली, पिछले तीन वर्षों में सड़क हादसों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने के बावजूद दुर्घटना क्षेत्रों को सुरक्षित करने के लिए अब कदम उठाए जा रहे हैं। मनपा ने शहर के ४८ डेथ स्पॉट पर सुधार कार्यों के लिए करीब २२ करोड़ ७ लाख रुपए खर्च करने का प्रस्ताव तैयार किया है। सवाल यह है कि जब इन स्थानों पर हादसों का खतरा पहले से मौजूद था, तो मुंबईकरों की जान बचाने के लिए समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?
मुंबई की सड़कों पर गड्ढे, खराब सड़कें, खतरनाक चौराहे, अपर्याप्त सिग्नल और अव्यवस्थित यातायात वाहन चालकों के साथ पैदल यात्रियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। अब मनपा इन ४८ स्थानों पर सड़क की मार्किंग, यातायात सिग्नल, सड़क विभाजक और अन्य सुधारात्मक कार्य करने की तैयारी में है। प्रस्तावित २२.०७ करोड़ रुपए के खर्च को ४८ स्थानों के हिसाब से देखें तो औसतन करीब ४६ लाख रुपए प्रति स्थान बैठते हैं। हालांकि, वास्तविक खर्च हर स्थान पर होने वाले काम के अनुसार अलग-अलग होगा। सवाल यह भी है कि सड़क सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च करने की नौबत १,११८ मौतों के बाद ही क्यों आई?
मनपा केवल करोड़ों रुपए के प्रस्ताव मंजूर करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। प्रशासन को बताना होगा कि काम कब शुरू होंगे, कब तक पूरे होंगे और उनकी गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा। क्या केवल सिग्नल लगाने और सड़क पर सफेद पट्टियां बनाने से हादसे रुक जाएंगे? दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक आकलन, स्ट्रीट लाइट, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में सुधार के बिना यह कवायद कितनी कारगर होगी? मुंबईकरों को घोषणाएं नहीं, सुरक्षित सड़कें चाहिए। अब देखना होगा कि २२ करोड़ रुपये खर्च करने की यह योजना वास्तव में लोगों की जान बचाती है या फिर मनपा की फाइलों तक ही सीमित रह जाती है।
