फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ से बॉलीवुड में डेब्यू करनेवाले आर. माधवन को इंडस्ट्री में २५ वर्ष हो चुके हैं। फिल्म ‘थ्री इडियट्स’, ‘तनु वेड्स मनू’, ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों में यादगार रोल निभानेवाले माधवन जल्द ही नेटफ्लिक्स की रोमांटिक फिल्म ‘आप जैसा कोई’ में सना शेख के साथ नजर आएंगे। पेश है, आर. माधवन से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
फिल्म ‘आप जैसा कोई’ जैसी रोमांटिक फिल्म करने की क्या वजह रही?
इस फिल्म की जब मुझे कहानी सुनाई तो उसे सुन मैं काफी प्रभावित हुआ। फिल्म में मैं संस्कृत सिखानेवाला प्रोफेसर बना हूं, जिसकी मुलाकात मैट्रीमोनियल साइट पर एक युवती से होती है, जो काफी आधुनिक खयालात की है। इस रिश्ते के लिए मेरे घरवाले मना कर देते है। उम्रदराज जोड़े की इस प्रेम कहानी का प्लॉट मुझे बेहद पसंद आया और मैंने हां कह दी।
इसके लिए आपने किस तरह की तैयारी की?
वैसे तो मेरी उम्र है ५५ वर्ष, लेकिन फिल्म में मेरी उम्र ४० वर्ष है। फिल्म में मुझे अपनी उम्र को पूरे १५ वर्ष कम दिखाना था। इसके लिए मैंने जिम जाकर काफी वर्कआउट किया। स्क्रीन पर मेरी उम्र कम दिखे इसलिए मुझे अपनी दाढ़ी हटाकर खुद को क्लीन शेव करना पड़ा। मैं अपना दाढ़ीवाला लुक बदलना नहीं चाहता था, लेकिन मेरे लिए यह बड़ा बदलाव था।
अधेड़ उम्र का प्यार क्या समाज स्वीकार करता है?
समाज का क्या है? कभी दंपति की उम्र के बीच फासला ज्यादा हो तब भी दिक्कत अगर कम हो तब भी दिक्कत। कहने वाले तो कुछ न कुछ कहते ही रहते हैं क्योंकि लोगों का काम है कहना। आज समाज बदल रहा है और हर चीज में स्वीकार्यता बढ़ रही है।
सुना है, फिल्म की शूटिंग के दौरान आप जमशेदपुर स्थित अपने पुश्तैनी घर गए थे?
जमशेदपुर जाना मेरे लिए एक खास अनुभव था। जमशेदपुर में मेरा जन्म हुआ और कई वर्षों तक मेरा वहां जाना नहीं हुआ। जब इस फिल्म की शूटिंग उस इलाके (हुगली) में हुई तो मैं अपने पुश्तैनी घर गया। बचपन में जो घर मुझे बहुत बड़ा लगता था वो इस बार छोटा नजर आया। जो लोग मेरे पास-पड़ोस में रहते थे अब उनमें शायद ही कोई वहां था। आइसक्रीम के साथ कुछ स्वीट्स को एन्जॉय करने के साथ ही मैं अपने पुराने घर की ढेर सारी यादों को अपने साथ सहेजकर ले आया।
फिल्म ‘आप जैसा कोई’ ओटीटी पर वापसी पर आप क्या कहना चाहेंगे?
सभी जानते हैं, ओटीटी इस दौर में मनोरंजन का बेहद सशक्त माध्यम है। यहां सशक्त कॉन्टेंट देखने को मिलता है। यहां फिल्मों के साथ डॉक्यूमेंटरी और वेब सीरीज भी हैं। अब किसी भी कलाकार के लिए यह मायने नहीं रखता कि वो किस प्लेटफॉर्म के लिए काम कर रहे हैं। अच्छे मौके मिलें तो बॉलीवुड क्या और हॉलीवुड क्या, ओटीटी क्या और टीवी क्या? बहरहाल इस वर्ष बड़े पर्दे पर मेरी दो फिल्में ‘दे दे प्यार दे’ और ‘धुरंधर’ रिलीज होनेवाली हैं।
बतौर एक्टर आपकी असुरक्षाएं क्या हैं?
लगभग सभी कलाकार जब अपनी डेट्स किसी फिल्म या प्रोजेक्ट को देते हैं, कई-कई दिनों तक घर के बाहर आउटडोर में होते हैं। शूटिंग के बाद हम उस लोकेशन में कहीं घूम-फिर नहीं सकते। होटल के कमरे में अकेलेपन के साथ तन्हाई होती है। परिवार के साथ ही बेटे वेदांत और पत्नी सरिता को बहुत मिस करता हूं। बेटा वेदांत स्विमिंग का नेशनल गोल्ड चैम्पियन है। जब वो छोटा था मैं उसे स्विमिंग के लिए ले जाया करता था। अब मेरी अनुपस्थिति में सरिता उसका और पूरे घर का खयाल रखती है। तन्हाइयां तब मुझे काटने दौड़ती हैं तब मुझे लगता है कि क्या मैं परिवार को छोड़कर पैसों के पीछे भाग रहा हूं? परिवार से दूर रहना मुझे गंवारा नहीं। फिर मैं सोचता हूं अक्षय कुमार और अजय देवगन को देखो। मेरी उम्र के हैं वे भी तो काम करते हैं। मैं क्यों ऐसा सोचता हूं? अकेलापन मेरी असुरक्षा है।
