सामना संवाददाता / मुंबई
रानसई बांध के भरने के बाद बहने वाले अतिरिक्त बारिश के पानी को कब रोका जाएगा। इसको लेकर स्थानीय निवासियों में इस साल भी सवाल उठने लगे हैं। बता दें कि रानसई बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव पिछले दस सालों से लंबित है। इसके लिए ७२ हेक्टेयर जमीन और अनुमति की जरूरत के कारण यह प्रस्ताव विलंबित हो रहा है।
बढ़ती आबादी और औद्योगिक क्षेत्र के कारण उरण तालुका में जल स्रोत बहुत कम हैं। एमआईडीसी का मध्यम आकार का रानसई बांध और जल संसाधन विभाग का पुनाडे बांध ही पानी के दो मुख्य स्रोत हैं। उरण में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और शहरी विकास हो रहा है इसलिए फिलहाल रोजाना ५० से ६० एमएलडी पानी की जरूरत है। हालांकि, रानसई बांध और पुनाडे बांध की क्षमता इतनी ज्यादा नहीं है। रानसाई बांध की जल संग्रहण क्षमता १० एमसीएम है, जबकि पुनाडे बांध की क्षमता बमुश्किल १.७५ एमसीएम है।
यदि इन दोनों बांधों के जल भंडारण पर निर्भर रहा जाए तो तालुका को केवल ३ से ४ महीने ही जलापूर्ति हो सकती है। इसलिए तालुका की पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उसे सिडको के हेतावने बांध और एमजेपी के बारवी बांध के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। तालुका में बड़े गोदामों के कारण इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
