मुख्यपृष्ठनए समाचारएक यात्री की अपबीती...कर देगी सोचने पर मजबूर

एक यात्री की अपबीती…कर देगी सोचने पर मजबूर

-क्या लोकल और मेट्रो स्टेशनों पर नहीं होनी चाहिए फर्स्ट एड की सुविधा?

-जागृति नगर मेट्रो स्टेशन पर फर्स्ट एड रूम खाली, बीमार यात्री को कैसे मिले मदद?

खुशबू सिंह

शनिवार को मैं अंधेरी से घाटकोपर मेट्रो से जा रही थी। थोड़ी तबीयत खराब थी, लेकिन हालत स्थिर। लेकिन अचानक मुझे तेज डायरिया शुरू हो गया। पेट में भयानक दर्द और कमजोरी ने मुझे परेशान कर दिया। किसी के लिए ऐसी स्थिति में अकेले सफर करना और भी मुश्किल हो जाता है। मैंने सोचा कि जागृति नगर मेट्रो स्टेशन पर उतरकर शायद कोई मदद मिल जाए, लेकिन वहां का नजारा देखकर मैं निराश हो गई।
जागृति नगर स्टेशन पर कोई प्राथमिक चिकित्सा सुविधा नहीं थी। एक फर्स्ट एड रूम था, लेकिन वो खाली पड़ा था। न कोई दवा थी, न कोई डॉक्टर। मैंने स्टेशन के स्टाफ से मदद मांगी। स्टाफ ने मेरी हालत देखकर तुरंत सहायता की। वे बहुत विनम्र थे और मेरे साथ खड़े रहे, लेकिन उनके पास कोई चिकित्सा सुविधा नहीं थी। उन्होंने मुझे पास के दिशा अस्पताल जाने की सलाह दी।
मुंबई की मेट्रो में हर दिन हजारों महिलाएं और यात्री सफर करते हैं और स्टेशन पर कई कर्मचारी भी काम करते हैं। अगर किसी यात्री या स्टाफ को अचानक कुछ हो जाए तो क्या होगा? जागृति नगर जैसे व्यस्त मेट्रो स्टेशन पर प्राथमिक चिकित्सा का न होना चिंता की बात है। सभी मेट्रो स्टेशनों पर प्राथमिक चिकित्सा होनी चाहिए, ताकि यात्री और स्टाफ दोनों सुरक्षित रहें।
मैं किसी तरह दिशा अस्पताल पहुंची और इलाज करवाया। स्टाफ की मदद के लिए मैं उनकी आभारी हूं, लेकिन मेट्रो स्टेशन पर प्राथमिक चिकित्सा की कमी ने मुझे बहुत परेशान किया। अगर वहां दवा या डॉक्टर होता तो मेरी मुश्किल इतनी न बढ़ती। वैसे इस पर आपका क्या खयाल है, स्टेशनों पर प्राथमिक उपचार की सुविधा होनी चाहिए या नहीं?

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