-विगत ६ महीनों में वसई-विरार में दर्ज महिला उत्पीड़न के मामलों ने बढ़ाई चिंता
राधेश्याम सिंह / विरार
वसई-विरार पुलिस कमिश्नरेट अंतर्गत महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार हो रही वृद्धि ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज महिला उत्पीड़न के मामलों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिससे सवाल उठने लगा है कि ‘घर से बाहर निकली लड़की कितनी सुरक्षित है? इस चिंता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करते हुए सुनसान जगहों, अंधेरे रास्तों और सड़क किनारों पर विशेष नजर रखनी शुरू कर दी है। गश्ती दलों को संवेदनशील इलाकों में विशेष रूप से तैनात किया गया है।
अधिकांश आरोपी होते हैं करीबी
पुलिस रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि ८० प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़िता के जान-पहचान वाले जैसे रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी या परिवार के सदस्य ही होते हैं। कई मामलों में पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को झांसे में लेकर या लालच देकर उनका शोषण किया गया। शहर के कई स्काईवॉक, झुग्गी बस्तियों और सुनसान इलाकों में रात के समय शराबियों और असामाजिक तत्वों की बढ़ती आवाजाही चिंता का विषय बन गई है। युवतियों ने शिकायत की है कि इन इलाकों में छेड़छाड़ और चोरी की घटनाएं आम होती जा रही हैं। पुलिस ने इन इलाकों को चिह्नित कर इन पर खास निगरानी रखने की योजना बनाई है। हालांकि, सिर्फ पुलिस की सख्ती से हालात नहीं सुधरेंगे। परिवार, समाज और संस्थाओं को मिलकर इस दिशा में कार्य करना चाहिए। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
छह महीनों में दर्ज मामले
दहेज उत्पीड़न- १४२
दहेज पीड़ित मृत्यु- १
बलात्कार- (महिलाएं)- ११२
बलात्कार- (नाबालिग)- ९२
विनयभंग- (महिलाएं)- १५२
विनयभंग-(नाबालिग)- ६४
छेड़छाड़- ६४
