-शक्ति कानून भूली…अब मकोका की पूड़ी
रामदिनेश यादव /मुंबई
राज्य में पिछले ३ वर्षों से महिलाओं पर अत्याचार के मामले ब़ढ़े हैं। महिलाओं की हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़ और विनयभंग की तमाम शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। महिला सुरक्षा के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों में तीन साल पहले पास हुए शक्ति कानून को सरकार अब तक लागू नहीं कर रही है, अब जब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार आरोपों के घेरे में है तो नया पूड़ी दिया है। सरकार के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के अनुसार, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर सरकार अब आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) लगाने पर विचार कर रही है। इस बयान पर शिवसेना महिला आघाड़ी ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की है।
उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि इस बारे में मंत्रिमंडल की बैठक में प्रारंभिक चर्चा हुई है और विधि एवं न्याय विभाग को इसकी कानूनी जांच करने के आदेश दिए गए हैं। अजीत पवार के इस बयान से शिवसेना महिला आघाड़ी का माथा ठनक गया है। उनका कहना है कि सरकार महिला सुरक्षा पर गंभीर नजर नहीं आ रही है। सिर्फ अलग-अलग बयान देकर महिलाओं को गुमराह करने का काम किया जा रहा है। चिंतामणि ज्ञानपीठ की ओर से शनिवार को आयोजित गुरुजन गौरव समारोह में अजीत पवार उपर्युक्त बयान दिए थे। इस अवसर पर उद्यमी, वरिष्ठ संपादक और वरिष्ठ नृत्यांगना को सम्मानित किया गया।
अजीत पवार के इस बयान को लेकर महिलाओं ने कड़ी नाराजगी भी जताई है। पूर्व महापौर व शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नगरसेविका किशोरी पेडणेकर ने कहा कि मकोका लगाना इतना आसान नहीं है, यह सरकार सिर्फ महिलाओं को मूर्ख बना रही है। अब तक शक्ति कानून को लागू नहीं कर पाई है। जो बने बनाए कानून को लागू नहीं कर पा रहे हैं, वे लोग अब महिला सुरक्षा मामले में आरोपियों पर मकोका कानून लगाने की बात कर रहे हैं। यह सरकार लाडली बहनों को मूर्ख बना रही है, लेकिन अब लाडली बहनें और इनके झांसे में नहीं आएंगी। एक अन्य महिला ने कहा कि आखिर कब तक यह सरकार हमें वोट के लिए इस्तेमाल करेगी। इस तरह हमें मूर्ख बनाकर यह सरकार एक बार सत्ता में आ सकती है बार-बार नहीं।
क्या कहा था अजीत पवार ने
अजीत पवार ने कहा कि महिलाओं के मामले में कानून और व्यवस्था अच्छी रहनी चाहिए इसलिए सरकार की कड़ी भूमिका रहती है। नए कानून बनाने के प्रयास जारी हैं। इस तरह के मामले घटित होने के बाद आरोपी, जांच, पूछताछ, सबूत आदि न्यायिक प्रक्रिया के चलते मुकदमा चलता ही रहता है। तब तक आरोपी पर मकोका जैसी धाराएं लगाने के संदर्भ में सरकार विचार कर रही है। मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर चर्चा हुई। इस विषय में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और सभी सहयोगी भी सकारात्मक हैं। इसलिए महिलाओं पर अत्याचार के मामलों में इस कानून को अमल में लाया जा सकता है या नहीं, इसकी जांच करने के निर्देश राज्य के विधि एवं न्याय विभाग को दिए गए हैं।
